यार्न के बेसिक रॉ-मटेरियल सस्ते होने से यार्न के दाम घटाने की मांग, टेक्सटाइल उद्योग को राहत की उम्मीद

सूरत। केंद्र सरकार द्वारा 3 अप्रैल को पेट्रोकेमिकल्स आधारित लगभग 30 प्रकार के रॉ-मटेरियल पर कस्टम ड्यूटी शून्य करने की घोषणा के बाद सूरत के टेक्सटाइल उद्योग को बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। उद्योगकारों ने अब यार्न के दामों में भी तत्काल कमी करने की मांग उठाई है।
सूरत में कपड़ा उत्पादन के लिए उपयोग होने वाला यार्न मुख्य रूप से एमईजी (MEG) और पीटीए (PTA) जैसे बेसिक रॉ-मटेरियल से तैयार होता है, जो पेट्रोलियम आधारित उत्पाद हैं। इन कच्चे माल की बड़े पैमाने पर विदेशों से आयात किया जाता है। अब तक इन पर 5 से 19 प्रतिशत तक अलग-अलग स्तर पर कस्टम ड्यूटी लगती थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दिए जाने से उत्पादन लागत में कमी आने की उम्मीद है।
टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब कच्चे माल की लागत कम होगी तो यार्न की कीमतों में भी कमी आनी चाहिए। हालांकि वीविंग उद्योग से जुड़े कारोबारियों को आशंका है कि स्पिनर्स और वितरक इस राहत का लाभ आगे नहीं बढ़ाएंगे। इसी कारण उद्योगकारों ने यार्न के दाम घटाने की मांग तेज कर दी है।
उद्योगकारों का कहना है कि पहले अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों जैसे युद्ध या कच्चे माल की कीमत बढ़ने पर यार्न के दाम तुरंत बढ़ा दिए जाते थे। ऐसे में अब जब आयात ड्यूटी समाप्त हो गई है तो उसी तरह तत्काल कीमतों में कमी की जानी चाहिए। यदि यार्न के दाम कम नहीं किए गए तो सूरत के विभिन्न टेक्सटाइल संगठन राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बना रहे हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि पेट्रोकेमिकल्स को ड्यूटी-फ्री करना सूरत टेक्सटाइल उद्योग के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे उत्पादन लागत घटेगी, निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन मजबूत होगी। हालांकि स्थानीय उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति लागू करना भी जरूरी बताया जा रहा है।

