टेक्सटाइल उद्योग गहरे संकट में, केंद्र से तत्काल राहत पैकेज की मांग

सूरत। देश का टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग वर्तमान में गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक उथल-पुथल तथा वेस्ट एशिया में जारी युद्ध के कारण उत्पादन, व्यापार और रोजगार पर व्यापक असर पड़ा है। इस स्थिति को देखते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीण खंडेलवाल को पत्र लिखकर टेक्सटाइल उद्योग और व्यापारियों के लिए तत्काल विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
बोथरा ने बताया कि इरोड, तिरुपुर, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, जयपुर, पानीपत, लुधियाना, भीलवाड़ा और भिवंडी जैसे देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब में उत्पादन की गति धीमी पड़ गई है और व्यापारिक गतिविधियां न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं। युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से कच्चे माल, डाई-केमिकल्स, गैस, बिजली और समुद्री भाड़े की लागत में 25 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारतीय टेक्सटाइल की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई है।
उन्होंने कहा कि सूरत और तिरुपुर जैसे केंद्रों में जहां पहले मशीनें चौबीसों घंटे चलती थीं, वहां अब 30 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है। काम की कमी और इकाइयों के आंशिक बंद होने से उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के श्रमिक अपने गृह राज्यों की ओर लौटने लगे हैं, जिससे भविष्य में कुशल श्रमिकों की कमी का संकट खड़ा हो सकता है। उद्योगपतियों के सामने निवेश और उत्पादन निर्णय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
बाजार में मांग कमजोर रहने से व्यापारियों का करोड़ों रुपये का स्टॉक फंसा हुआ है तथा रिटेल और होलसेल बाजारों में भुगतान चक्र धीमा पड़ने से नकदी संकट गहरा गया है। लगभग 40 से 45 प्रतिशत एमएसएमई उद्यमी और छोटे व्यापारी डिफॉल्ट की स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं तथा बैंक लोन की ईएमआई और वर्किंग कैपिटल की कमी के कारण अनेक इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
बोथरा ने कहा कि यह केवल उद्योग या व्यापार का संकट नहीं बल्कि करोड़ों परिवारों के रोजगार और आजीविका से जुड़ा राष्ट्रीय आर्थिक मुद्दा है। उन्होंने केंद्र सरकार से टेक्सटाइल एमएसएमई और व्यापारियों को 6 से 12 माह का लोन मोरेटोरियम, ब्याज सब्सिडी योजना पुनः लागू करने, गैस व बिजली दरों पर सब्सिडी, जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक करने, बिना अतिरिक्त कोलैटरल के वर्किंग कैपिटल बढ़ाने तथा मजदूर पलायन रोकने के लिए विशेष सहायता पैकेज लागू करने की मांग की है।




