राजस्थानसामाजिक/ धार्मिक

शांतिदूत से जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर हर्षित हुईं साध्वीवृंद व समणीवृंद 

आचार्यश्री से मंगल आशीष प्राप्त कर विंदा हुई स्थानकवासी संप्रदाय की साध्वियां

प्रेक्षाध्यान शिविरार्थियों को आचार्यश्री ने प्रदान की उपसंपदा03.04.2026, शुक्रवार, लाडनूं : ज्ञान और ध्यान दोनों ही जीवन के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। आगमों का ज्ञान होना, धार्मिक शास्त्रों का ज्ञान होना भी अच्छी बात होती है। आगमों के स्वाध्याय से, चितारने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकता है। ध्यान की कुछ पूर्ति भी इसके माध्यम से हो सकता है, और आदमी वीतरागता, अहिंसा आदि की ओर गति कर सकता है। आध्यात्मिक विद्या का सीधा असर आत्मा पर हो सकता है। अन्य विषयों अर्थात अंग्रेजी, भूगोल, खगोल आदि विषयों का ज्ञान रखने वाले में अहंकार की स्थिति बन सकती है। क्योंकि ये सारे ज्ञान आत्मा को सीधे प्रभावित नहीं करते। इसलिए अहंकार की संभावना बन सकती है। ज्ञान को दो भागों में बांटें तो अध्यात्म विद्या का ज्ञान और भौतिकता युक्त अन्य विषयों का ज्ञान। आध्यात्मिकता का ज्ञान जो आगमों आदि शास्त्रों के माध्यम से होता है, उसका ज्ञान आत्मा को चेतना की ओर ले जाने वाला हो सकता है। अन्य भाषाओं व विषयों की जानकारी रखने वाले में कभी अहंकार आ जाए तो यह ध्यान देने वाली है कि यदि कोई लक्ष्य बना ले कि अहंकार से बचने के लिए मुझे थोड़ा ध्यान में लगाने का प्रयास करना चाहिए। प्रेक्षाध्यान की साधना के द्वारा भी विद्या के साथ आने वाले अहंकार आदि से बचा जा सकता है। अपनी आत्मा को संयम, तप, साधना, वैराग्य वृत्ति से भावित होती रहे, वह जिससे आत्मा का कल्याण होता रहे।

उक्त पावन प्रत्युत्तर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अध्यात्मवेत्ता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शुक्रवार को मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान साध्वीवृंद व समणीवृंद की जिज्ञासाओं के संदर्भ में प्रदान किए तो कितने-कितने अन्य श्रद्धालुओं की जिज्ञासाएं भी मानों सामहित हो गईं। अविरल प्रवाहित होने वाली इस ज्ञानगंगा ने सभी को आध्यात्मिक ज्ञान से आप्लावित कर दिया।

आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में स्थानकवासी श्रमणसंघ की दोनों साध्वीजी आज विहार करने वाले थे तो आचार्यश्री ने उनके प्रति भी आध्यात्मिक मंगलकामना की। श्रमणसंघ की साध्वीजी ने अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। प्रेक्षाध्यान शिविर के शिविरार्थियों को आचार्यश्री ने उपसंपदा प्रदान की। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में दिल्ली ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों की अपनी प्रस्तुति दी। आचार्यश्री ने ज्ञानार्थियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।

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