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युद्ध की मार से सूरत का कपड़ा उद्योग दबाव में, कच्चे माल से लेकर पैकिंग तक हर स्तर पर बढ़ी लागत

ग्रे, यार्न, एम्ब्रॉयडरी और पैकिंग सामग्री के दामों में तेजी, ग्राहकी सुस्त; गैस सिलेंडर की किल्लत से कारोबारियों की चिंता बढ़ी

Report By;-Narayan Sharma

सूरत।मध्य पूर्व में जारी युद्ध के असर अब देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब सूरत तक महसूस होने लगे हैं। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे माल की आपूर्ति में बाधा और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी ने सूरत के कपड़ा उद्योग पर गहरा प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। मिलों से लेकर ग्रे मार्केट, एम्ब्रॉयडरी जॉब वर्क और पैकिंग सामग्री तक लगभग हर स्तर पर लागत बढ़ती जा रही है, जबकि दूसरी ओर बाजार में ग्राहकी सुस्त पड़ती दिखाई दे रही है।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में जो तैयार माल पहले से स्टॉक में पड़ा हुआ है उसकी कॉस्टिंग लगातार बढ़ रही है, लेकिन बिक्री में अपेक्षित तेजी नहीं है। इससे व्यापारियों की पूंजी फंसने लगी है और आने वाले समय में यदि स्थिति नहीं सुधरी तो कपड़ा उद्योग के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


कपड़ा मिलों पर भी पड़ा गहरा असर
सूरत में संचालित टेक्सटाइल मिलों पर भी युद्ध का असर साफ दिखाई दे रहा है। एक ओर कोयले की कमी और दूसरी ओर कुशल कारीगरों की उपलब्धता में कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
इसके चलते कई मिलों ने अपने जॉब चार्ज में वृद्धि कर दी है। सर्मिली, 70×72 और वेटलेस जैसे आइटम पर डिस्पैच बेसिस पर लगभग 50 पैसे से लेकर 1 रुपये प्रति मीटर तक बढ़ोतरी की गई है। मिल मालिकों का कहना है कि बढ़ती ऊर्जा लागत और कच्चे माल के दामों ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।


ग्रे मार्केट में भी तेजी
लगातार बढ़ते यार्न के भावों ने ग्रे मार्केट में भी हलचल पैदा कर दी है। सर्मिली, वेटलेस और पैटन जैसे फैब्रिक आइटम में 2 से 3 रुपये प्रति मीटर तक तेजी देखने को मिल रही है।
विवर्स का कहना है कि यार्न की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसके कारण ग्रे कपड़े के भाव बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गई है।
एम्ब्रॉयडरी जॉब वर्क भी महंगा
साड़ी और ड्रेस मटेरियल में होने वाले एम्ब्रॉयडरी जॉब वर्क की लागत में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
उदाहरण के तौर पर, सिरोस डायमंड जो पहले 20 किलो का पैक लगभग 9000 रुपये में मिलता था, अब वही करीब 13000 रुपये तक पहुंच गया है।
इसी तरह पाइपिंग का रेट 14 रुपये से बढ़कर 16 रुपये हो गया है, जबकि एम्ब्रॉयडरी में इस्तेमाल होने वाला पेपर जो पहले 2.80 रुपये में मिलता था, अब 4.20 रुपये तक पहुंच गया है।
पैकिंग आइटम में सबसे ज्यादा उछाल
कपड़ा उद्योग से जुड़े व्यापारियों के अनुसार सबसे अधिक बढ़ोतरी पैकिंग सामग्री में देखने को मिल रही है।
साड़ी पैक करने के लिए इस्तेमाल होने वाला पाउच पहले लगभग 7 रुपये में मिल जाता था, जो अब बढ़कर 10 रुपये तक पहुंच गया है।
इसी प्रकार प्लास्टिक थैली का बंडल पहले 1700 रुपये में मिलता था, जो अब करीब 2600 रुपये तक पहुंच गया है।
फोम के दामों में तो लगातार तेजी बनी हुई है। जो फोम पहले 6 रुपये में मिल रहा था वह अब 9 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 3 रुपये वाला फोम अब 5 रुपये तक बिक रहा है।
गैस सिलेंडर की किल्लत से भी परेशानी
इसके साथ ही बाजार में गैस सिलेंडर की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कई दुकानों और छोटे यूनिटों में काम करने वाले कर्मचारियों को सिलेंडर नहीं मिल पाने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
यह स्थिति यदि लंबे समय तक जारी रही तो छोटे व्यापारियों और कर्मचारियों के लिए परेशानी और बढ़ सकती है। यहां तक कि बाजार में चाय बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी चाय के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है।
व्यापारियों की बढ़ी चिंता
कुल मिलाकर युद्ध के कारण सूरत के कपड़ा व्यापारियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। एक ओर मिलों में जॉब चार्ज बढ़ गए हैं, दूसरी ओर एम्ब्रॉयडरी और पैकिंग सामग्री महंगी हो गई है।
ऐसे में जो माल मिलों या एम्ब्रॉयडरी यूनिटों में पड़ा हुआ है उसकी लागत भी बढ़ गई है, जबकि बाजार में बिक्री उतनी तेज नहीं है।व्यापारियों का कहना है कि मार्च एंडिंग के समय पर यह स्थिति खास तौर पर एमएसएमई सेक्टर के लिए चुनौती बन सकती है। यदि युद्ध लंबा चलता है और लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में सूरत के कपड़ा उद्योग को और भी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

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