माटी में मिला माटी का लाल: समाजसेवी विक्रम सिंह शेखावत पंचतत्व में विलीन
समाज के लिए आधुनिक अस्पताल बनाने का सपना अधूरा रह गया

सूरत। राजस्थान के झुंझुनू जिले के पिलानी के निकट स्थित बनगोटड़ी गांव के मूल निवासी, प्रख्यात समाजसेवी और कुशल संगठनकर्ता विक्रम सिंह शेखावत का परसों दोपहर हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव बनगोटड़ी ले जाया गया, जहां गांव और समाज की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन से सूरत सहित पूरे राजस्थान समाज में शोक की लहर फैल गई है।

स्व. विक्रम सिंह शेखावत के पिता राजपाल सिंह शेखावत भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। श्रीलंका में शांति सेना के मिशन के दौरान वे युद्ध में घायल हुए थे, जिसके बाद मेडिकल पेंशन पर सेवानिवृत्त होकर परिवार सहित सूरत आकर बस गए। बाद में उन्होंने रिलायंस में सिक्योरिटी हेड के रूप में कार्य किया और आगे चलकर पूरे देश में फैला सुरक्षा सेवा का बड़ा व्यवसाय स्थापित किया।
विक्रम सिंह शेखावत की प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान में तथा आगे की पढ़ाई सूरत के केंद्रीय विद्यालय में हुई। उन्होंने एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और बाद में अपने पिता के साथ सुरक्षा व्यवसाय से जुड़कर उसे आगे बढ़ाया।
बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक रहे शेखावत ने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। संघ के मार्गदर्शन में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में सूरत जिला उपाध्यक्ष का दायित्व भी मिला। कोरोना काल में उन्होंने मानव सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उमरा श्मशान घाट में हजारों कोविड पीड़ितों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करवाई।
बाद में उन्हें सामाजिक समरसता के कार्य में लगाया गया, जहां वे सूरत शहर के सामाजिक समरसता संयोजक बने और समाज में एकता व सद्भाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहे। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें राजस्थान युवा संघ का अध्यक्ष चुना गया और उत्कृष्ट कार्यों के कारण उन्हें पुनः इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
उनके नेतृत्व में राजस्थान युवा संघ ने शिक्षा, चिकित्सा, गौ सेवा और मानव सेवा के कई कार्य किए। उन्होंने सूरत में बसे मारवाड़ी समाज को एक मंच पर लाकर “गुजराती मारवाड़ी समाज” की अवधारणा को मजबूत किया।
विक्रम सिंह शेखावत लघु उद्योग भारती सूरत के अध्यक्ष भी रहे। उनके नेतृत्व में मात्र 45 दिनों में 1100 नए सदस्य जोड़कर एक रिकॉर्ड बनाया गया, जिसके लिए उन्हें संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल द्वारा देवास (मध्यप्रदेश) में सम्मानित किया गया।
वे राजस्थान फाउंडेशन सूरत चैप्टर के सचिव भी थे तथा समत्व फाउंडेशन के माध्यम से हजारों युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने का कार्य कर रहे थे। उनका सपना सूरत को “बेगर फ्री सिटी” बनाना था।
राजस्थान समाज के लिए उनका सबसे बड़ा सपना सूरत में आधुनिक सुविधाओं से युक्त ऐसा अस्पताल बनाना था, जहां आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कार्डियक और न्यूरो जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त या रियायती दर पर मिल सकें। उन्होंने अपने जन्मदिन पर यह संकल्प भी लिया था कि जब तक यह सपना पूरा नहीं होगा, वे किसी भी मंच पर पगड़ी या दुपट्टा स्वीकार नहीं करेंगे।
वर्ष 2025 में राजस्थान स्थापना दिवस के अवसर पर उनके नेतृत्व में 12 हजार से अधिक मारवाड़ी महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में सामूहिक घूमर नृत्य प्रस्तुत कर ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड बनाया गया, जिसे राष्ट्रीय मीडिया में भी प्रमुखता मिली।
उनके निधन के बाद सूरत में अंतिम दर्शन के लिए केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल, विधायक संगीता पाटिल सहित अनेक नेता, उद्योगपति और समाजजन पहुंचे थे। वहीं अंतिम संस्कार में राजस्थान के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ और श्रवण सिंह बगड़ी सहित सूरत से सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
विक्रम सिंह शेखावत का जीवन समाज सेवा, संगठन शक्ति और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत उदाहरण रहा। उनके असामयिक निधन से समाज ने एक दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता और समर्पित समाजसेवी को खो दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना कठिन है। उनके विचार और कार्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।




