
सूरत। वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध जैसी स्थिति और क्रूड ऑयल के दामों में भारी बढ़ोतरी का असर अब सूरत के प्रमुख टेक्सटाइल सेक्टर—रेपियर जैकार्ड उद्योग—पर साफ दिखाई देने लगा है। सूरत के सचिन GIDC में आयोजित रेपियर जैकार्ड एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक में उद्योग को बचाने के लिए कई कड़े फैसले लिए गए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.के. मानिया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में करीब 900 वीवर्स मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि क्रूड ऑयल महंगा होने से यार्न और जरी जैसे कच्चे माल के दाम 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे उत्पादन लागत 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। ऐसे में उद्योग को बचाने के लिए अब नए सौदों में कपड़े के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि व्यापारियों को नए रेट की जानकारी पारदर्शी तरीके से दी जाएगी। इसके लिए सभी वीवर्स अपने लेटरपैड पर बढ़े हुए दाम लिखकर सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप स्टेटस पर साझा करेंगे, ताकि बाजार में किसी तरह का भ्रम न रहे।
पेमेण्ट सिस्टम को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब सभी लेन-देन ‘बिल टू बिल’ आधार पर अधिकतम 45 दिनों में पूरा करना होगा। यदि कोई व्यापारी 45 दिन के बाद भुगतान करता है तो उससे प्रति माह 1.5 प्रतिशत ब्याज वसूला जाएगा। वहीं, 90 दिन से अधिक भुगतान में देरी करने वाले व्यापारियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उनके नाम सार्वजनिक किए जाएंगे।
एसोसिएशन ने वीवर्स को सलाह दी है कि वे केवल ऑर्डर के अनुसार ही यार्न की खरीद करें और अतिरिक्त उत्पादन से बचें। जरूरत न होने पर मशीनें बंद रखने और बाजार में सप्लाई-डिमांड का संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
सूरत में इस उद्योग से लगभग 4,000 वीवर्स और 7,000 से अधिक छोटी-बड़ी कंपनियां जुड़ी हुई हैं। ऐसे में बढ़ती लागत और भुगतान में देरी से पूरा सेक्टर दबाव में है। एसोसिएशन ने व्यापारियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को समझते हुए बढ़े हुए दाम स्वीकार करें, ताकि उद्योग को स्थिर रखा जा सके



