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गैस की कमी से परेशान श्रमिकों ने पकड़ी वतन की राह,

सूरत के टेक्सटाइल उद्योग में कारीगरों की कमी का खतरा

सूरत। सूरत में गैस की भारी कमी के कारण उद्योगों में स्थिति गंभीर होती जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई परप्रांतीय श्रमिक काम छोड़कर अपने वतन लौटने लगे हैं। उद्योग जगत का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो शहर के प्रमुख टेक्सटाइल उद्योग में कारीगरों की भारी कमी हो सकती है।
जानकारी के अनुसार गैस की बढ़ती कीमतों और लगातार हो रही कमी से उद्योगों की उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कई श्रमिकों का मानना है कि आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं, इसलिए उन्होंने अपने घर लौटना शुरू कर दिया है। उद्योग क्षेत्र में यह स्थिति कोरोना काल की याद दिला रही है, जब बड़ी संख्या में श्रमिक शहर छोड़कर अपने गांवों की ओर लौट गए थे।
सूरत की अंजनी इंडस्ट्री में काम करने वाले करीब 40 से 50 प्रतिशत श्रमिक पहले ही अपने वतन के लिए रवाना हो चुके हैं। गैस की कमी और महंगाई से परेशान होकर कई अन्य श्रमिक भी जाने की तैयारी में हैं। इससे उद्योगों के संचालन पर सीधा असर पड़ने लगा है और उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजराइल के बीच तनाव के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर स्थानीय बाजार में भी देखने को मिल रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कमर्शियल गैस सिलेंडर का दाम काले बाजार में चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच गया है।
उद्योगकारों का कहना है कि अब स्थिति यह हो गई है कि काले बाजार में भी आसानी से गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इसके कारण श्रमिकों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से कई श्रमिक शहर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
सूरत के उद्योगपतियों ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि गैस आपूर्ति को सुचारु करने के लिए जल्द कोई समाधान निकाला जाए, अन्यथा पहले गैस संकट और अब श्रमिकों की कमी के कारण टेक्सटाइल उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच सकता है। साथ ही यार्न के बढ़ते दामों ने भी उद्योगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

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