अवध संगरीला में दो आचार्यों का आध्यात्मिक मंगल मिलन
संवत्सरी एकता पर हुई चर्चा, जैन समाज की एकता का दिया संदेश

सूरत। नवसारी से साबरमती की विहार यात्रा के दौरान आत्म भवन, अवध संगरीला (बलेश्वर) में श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा., गच्छाधिपति आचार्य विजय अभयदेवसूरीश्वरजी म.सा. तथा आचार्य मोक्षरत्न जी म.सा. का आध्यात्मिक मंगल मिलन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
संतों के इस मिलन को धर्म जगत में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि संसार में कई प्रकार के मिलन होते हैं, लेकिन संतों का मिलन धर्म की गंगा के संगम के समान होता है। जब दो महान आचार्य एक मंच पर मिलते हैं तो वह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि तप, त्याग और जिनवाणी की दो धाराओं का संगम होता है।
इस मंगल मिलन के दौरान आचार्य द्वय के बीच जैन समाज में संवत्सरी एकता को लेकर विशेष चर्चा हुई। ज्ञातव्य है कि आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. पिछले कई वर्षों से जैन समाज में संवत्सरी एकता स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने इस संबंध में विभिन्न जैन सम्प्रदायों के आचार्यों को पत्र लिखकर संवत्सरी पर्व की तिथि और माह एक करने का आग्रह भी किया है।
उनका मानना है कि यदि संवत्सरी महापर्व एक ही दिन मनाया जाए तो यह पूरे जैन समाज के लिए गौरव और एकता की मिसाल बनेगा।
मंगल मिलन के अवसर पर अवध संगरीला श्रीसंघ के श्रावक-श्राविकाएं भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. ने गच्छाधिपति आचार्य विजय अभयदेवसूरीश्वरजी म.सा. को साहित्य भेंट कर सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम के पश्चात गच्छाधिपति आचार्य विजय अभयदेवसूरीश्वरजी म.सा. ने आगे के प्रवास के लिए बलेश्वर स्थित श्री लब्धि पार्श्वनाथ तीर्थधाम की ओर विहार किया।


