
अहमदाबाद। शहर में रसोई गैस को लेकर बड़ा घोटाला सामने आ रहा है, जहां घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से गैस निकालकर कॉमर्शियल सिलेंडरों में भरकर ब्लैक में बेचने का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। सूत्रों के अनुसार शहर में लगभग ढाई से तीन लाख लोगों के पास एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन हैं, लेकिन पीएनजी लेने के बावजूद अधिकांश लोगों ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर नहीं किए हैं।
जानकारी के मुताबिक अहमदाबाद में करीब 12 से 15 लाख घरेलू और लगभग 2 लाख कॉमर्शियल एलपीजी कनेक्शन हैं, जबकि शहर के 60 से 70 प्रतिशत क्षेत्रों में पीएनजी लाइन पहुंच चुकी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन जारी रखे हैं, जिससे डबल कनेक्शन की स्थिति बनी हुई है। अनुमान है कि कुल कनेक्शनों में 25 से 30 प्रतिशत यानी करीब ढाई से तीन लाख कनेक्शन डबल हैं।
इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व घरेलू सिलेंडरों से गैस निकालकर कॉमर्शियल सिलेंडरों में भर रहे हैं और ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इससे आम उपभोक्ताओं को मिलने वाले सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम होने की आशंका भी जताई जा रही है। वहीं 25 दिन बाद सिलेंडर बुकिंग के नियम का भी दुरुपयोग कर कॉमर्शियल उपयोग में लिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार कॉमर्शियल गैस की कमी के चलते बाजार में इसकी भारी मांग है। सरकार द्वारा कॉमर्शियल सिलेंडरों के उपयोग में 60 प्रतिशत तक कटौती किए जाने के बाद एजेंसियां अब केवल स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल और मंदिर जैसी आवश्यक सेवाओं को ही सिलेंडर उपलब्ध करा रही हैं।
इस कमी का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। सामान्यतः 1900 रुपये में मिलने वाला 19 किलो का कॉमर्शियल सिलेंडर अब 4500 से 5000 रुपये तक ब्लैक में बिक रहा है। जबकि घरेलू सिलेंडर से गैस निकालकर भरे गए कॉमर्शियल सिलेंडर की लागत करीब 1250 रुपये आती है, जिससे काले कारोबारियों को भारी मुनाफा हो रहा है।
पूरे मामले में आपूर्ति विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध रिफिलिंग नेटवर्क के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य पूर्व में तनाव के चलते एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी सरकार की चिंता बढ़ गई है।




