
सूरत। जीएसटी स्क्रूटिनी में तीन साल से पुराने मामलों को नहीं खोलने के नियम के बावजूद सूरत में वर्ष 2017-18 और 2018-19 के ई-वे बिल से जुड़े मामलों में व्यापारियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। पिछले एक महीने से जीएसटी विभाग द्वारा ऐसे पुराने मामलों को खोलकर व्यापारियों से जवाब मांगा जा रहा है, जिससे व्यापारियों में चिंता का माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार यदि व्यापारी नोटिस का जवाब नहीं देते हैं तो सीधी वसूली की कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि नियमों के अनुसार तीन साल से अधिक पुराने मामलों में नोटिस देना संभव नहीं है, फिर भी अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है।
बताया जा रहा है कि नोटिस मिलने के बाद जब व्यापारी अधिकारियों से मिलने जाते हैं तो उन्हें राशि जमा करने के लिए कहा जाता है। साथ ही यह भी चेतावनी दी जाती है कि रकम नहीं भरी तो बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया जाएगा या जीएसटी नंबर सस्पेंड कर दिया जाएगा। ऐसे में कई व्यापारी डर के कारण रकम जमा कर रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के शुरुआती डेढ़ साल के दौरान ई-वे बिल में हुई तकनीकी या प्रक्रियागत गलतियों को आधार बनाकर अब पुराने मामलों को खोला जा रहा है। इससे व्यापारियों को फिर से “इंस्पेक्टर राज” जैसा माहौल महसूस होने लगा है।
व्यापारी संगठनों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर विरोध या आंदोलन होने की संभावना भी जताई जा रही है।



