
यदि वर्तमान समय में कपड़े या किसी अन्य वस्तु की खरीद की जाती है, तो उसका भुगतान 31 मार्च तक करना अनिवार्य हो जाता है। इसी कारण व्यापारी खरीदारी बंद करने लगे हैं।
सूरत।आयकर अधिनियम की धारा 43B (h) के अंतर्गत माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (MSME) में पंजीकृत कारखानेदारों अथवा सेवा प्रदाताओं से की गई किसी भी खरीद का भुगतान 45 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है। यदि तय अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो उस बकाया राशि को खरीदार की आय मानकर उस पर आयकर लगाया जाता है।
इस प्रावधान के कारण लगातार तीसरे वर्ष लेखा वर्ष की समाप्ति से लगभग दो महीने पहले ही सूरत का टेक्सटाइल उत्पादन और व्यापार बुरी तरह प्रभावित होने लगा है। चालू वर्ष में भी इसकी नकारात्मक असर दिखाई देने लगी है।
वीविंग कारखानेदारों के अग्रणी प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से केंद्र सरकार के समक्ष यह मांग रखी जा रही है कि ऐसा कानून नहीं होना चाहिए जो व्यापार-उद्योग को नुकसान पहुंचाए, लेकिन अब तक इस धारा में कोई राहत नहीं दी गई है।
वर्तमान स्थिति यह है कि व्यापारी वीविंग यूनिटों से ग्रे कपड़ा या फिनिश्ड फैब्रिक की खरीद बंद करने लगे हैं, क्योंकि 45 दिनों के भीतर यानी 31 मार्च 2026 से पहले भुगतान करना अनिवार्य हो जाता है। सामान्यतः टेक्सटाइल उद्योग में भुगतान की परंपरा 90 से 120 दिनों की रही है। ऐसे में 45 दिन की बाध्यता से डरकर व्यापारी पिछले दो वर्षों से और इस वर्ष लगातार तीसरे साल फरवरी माह से ही खरीद रोक देते हैं, जिससे पूरा उद्योग ठप हो जाता है। फिलहाल सूरत के टेक्सटाइल कारोबार में लेन-देन अत्यंत सीमित हो गया है।
MSME में शामिल नहीं हैं ट्रेडर्स, भुगतान 4 से 6 महीने में
सूरत के टेक्सटाइल ट्रेडर्स की स्थिति भी भुगतान के मोर्चे पर बेहद कठिन है। केंद्र सरकार ने व्यापारियों को MSME की श्रेणी से बाहर रखा है, इसलिए उन्हें MSME से जुड़े किसी भी लाभ का फायदा नहीं मिलता। परिणामस्वरूप आयकर की धारा 43B (h) के तहत 45 दिनों में भुगतान की छूट भी व्यापारियों को प्राप्त नहीं है।
टेक्सटाइल व्यापारी ग्रे कपड़े का प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन कराकर उसे रिटेल व्यापारियों को बेचते हैं। सूरत का अधिकांश टेक्सटाइल माल गुजरात के बाहर अन्य राज्यों में बिकता है। बाहरी राज्यों के खरीदार सूरत के व्यापारियों को भुगतान करने में 120 से 180 दिन तक लगा देते हैं। यदि व्यापारी जल्दी भुगतान की मांग करते हैं तो माल लौटाने की धमकी दी जाती है।
धारा 43B (h) से बचने के लिए अपनाई जा रही तदबीरें
इस कानून के दुष्प्रभाव से बचने के लिए उद्योग में कई तरह की अस्थायी व्यवस्थाएं अपनाई जा रही हैं, जैसे—
भुगतान प्राप्त होने के बाद राशि को बचत के रूप में वापस करना।
मैन्युफैक्चरर द्वारा व्यापार के लिए अलग से नॉन-MSME ट्रेडिंग फर्म स्थापित करना।
वस्तुओं की वास्तविक वापसी के बजाय कागजी दस्तावेजों के जरिए गुड्स रिटर्न दिखाना।
उद्योग जगत का मानना है कि यदि इस धारा में संशोधन या राहत नहीं दी गई, तो सूरत सहित पूरे देश के टेक्सटाइल सेक्टर पर इसका गंभीर और दीर्घकालिक नकारात्मक असर पड़ेगा।




