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RERA पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “बंद कर देना बेहतर, सिर्फ बिल्डरों को ही फायदा”

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराज़गी जताते हुए कहा कि यदि यह संस्था सिर्फ डिफॉल्टर बिल्डरों को ही राहत दे रही है, तो इसे बंद कर देना ही बेहतर होगा। कोर्ट ने राज्यों से यह भी सवाल किया कि यह संस्था आखिर आम जनता के हितों की रक्षा के लिए बनी है या बिल्डरों की सुविधा के लिए।
गुरुवार को हिमाचल प्रदेश में RERA कार्यालय के स्थानांतरण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की यह कड़ी टिप्पणी सामने आई। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि RERA का उद्देश्य घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह डिफॉल्टर बिल्डरों के लिए संरक्षण का माध्यम बनती दिखाई दे रही है।
कोर्ट ने कहा, “यह संस्था डिफॉल्टर बिल्डरों को सुविधाएं देने के अलावा कुछ नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में इसे समाप्त कर देना ही बेहतर होगा।” पीठ ने राज्यों से गंभीरता से विचार करने को कहा कि RERA वास्तव में किसके हित में काम कर रही है।
यह टिप्पणी उस समय आई जब हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राज्य RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। इससे पहले, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 जून 2025 के इस सरकारी नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट का मानना था कि सरकार ने वैकल्पिक स्थानों का उचित परीक्षण किए बिना कार्यालय स्थानांतरण का निर्णय लिया था, जिससे RERA की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए राज्य सरकार को राहत दी और RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया से आम जनता या RERA के आदेशों से प्रभावित लोगों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए।
साथ ही, पीठ ने निर्देश दिया कि RERA कार्यालय के साथ-साथ अपील ट्रिब्यूनल को भी धर्मशाला में स्थानांतरित किया जाए, ताकि लोगों को अपील के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलीलें पेश कीं। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी एक अन्य मामले में हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के मुख्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने पर हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक हटाई थी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों ने RERA की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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