
अहमदाबादः गुजरात में स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनाव समय पर होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। ऐसे में अहमदाबाद सहित राज्य की 17 महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं, 31 जिला पंचायतों और 180 से अधिक तालुका पंचायतों में अस्थायी अवधि के लिए प्रशासक राज लागू होने की प्रबल संभावना है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परिसीमन, आरक्षित सीटों के पुनर्निर्धारण और मतदाता सूची की अंतिम प्रक्रिया में देरी हो रही है। विशेष रूप से इस बार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण अभी पूरा नहीं हो पाया है, जिससे चुनाव की समय-सीमा आगे खिसकती जा रही है। नवगठित महानगरपालिकाओं में वार्डों की संरचना और प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित करने में भी पर्याप्त समय लग रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान निर्वाचित निकायों का कार्यकाल समाप्त होते ही राज्य सरकार इन सभी संस्थाओं में कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करेगी। इस दौरान नीतिगत और बड़े विकासात्मक फैसलों पर औपचारिक रोक रहेगी, जबकि रोजमर्रा के आवश्यक प्रशासनिक कार्य अधिकारियों के माध्यम से चलते रहेंगे।
स्थिति को और जटिल बनाने वाला एक अहम कारण केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा मतदाता सूची का विशेष संशोधन अभियान है। फिलहाल गुजरात समेत देश के 12 राज्यों में यह अभियान जारी है। अहमदाबाद सहित राज्य की सभी 17 महानगरपालिकाओं, 80 नगरपालिकाओं, 31 जिला पंचायतों और करीब 180 तालुका पंचायतों के चुनाव नई और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही कराए जा सकते हैं, ऐसा कानूनी प्रावधान है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से जुड़ी आवेदनों की प्रक्रिया जारी है और 17 फरवरी को संशोधित मतदाता सूची जारी होने की संभावना है। तब तक स्थानीय निकाय चुनाव कराना संभव नहीं है। इसके अलावा फरवरी-मार्च में कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाएं तथा उसके बाद स्कूलों की आंतरिक परीक्षाएं शुरू होने से चुनाव की तैयारी और कठिन हो गई है।
इन परिस्थितियों के बीच 9 मार्च को राज्य चुनाव आयोग द्वारा सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में संभावित चुनाव कार्यक्रम, प्रशासक राज की अवधि और चरणबद्ध चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।




