10 साल में गुजरात का बजट 166% बढ़ा, इस बार 4 लाख करोड़ से ज्यादा का अनुमान

गांधीनगर। गुजरात सरकार 18 फरवरी को वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश करेगी। अनुमान है कि इस बार बजट का आकार 3.70 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। पिछले दस वर्षों में राज्य का बजट लगभग तीन गुना बढ़ा है। वर्ष 2015-16 में बजट का आकार करीब 1.37 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 3.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, यानी करीब 166 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।
आगामी बजट को लेकर अर्थशास्त्रियों और पूर्व मंत्रियों ने सरकार को कई अहम क्षेत्रों पर ध्यान देने की सलाह दी है। पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े आयोजनों पर होने वाले खर्च को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि गैर-उत्पादक खर्च से जनता पर बोझ बढ़ सकता है। वहीं, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जय नारायण व्यास ने कहा कि बजट की सफलता का आकलन इस बात से होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कितनी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में कम खर्च पर चिंता जताते हुए कहा कि बीमारी के समय नागरिकों को अब भी बड़ा हिस्सा अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।
राज्य के बढ़ते कर्ज को लेकर भी विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि कर्ज का स्तर लगातार बढ़ रहा है और दीर्घकाल में यह आर्थिक संतुलन के लिए चुनौती बन सकता है। माइक्रो इंडस्ट्री को बचाने के लिए विशेष पैकेज और सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने की भी मांग उठी है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में छोटी उद्योग इकाइयाँ संकट का सामना कर रही हैं।
चौथे वित्त आयोग के अध्यक्ष यमल व्यास ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में राज्य ने जरूरतों के अनुसार बजट पेश किए हैं और इस बार भी आम नागरिक, उद्योग और किसानों के हितों पर ध्यान रहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता ने खर्च नीति को स्पष्ट और संतुलित रखने पर जोर दिया और वित्तीय अनुशासन की जरूरत बताई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य अपनी आय का लगभग 64.43 प्रतिशत हिस्सा विकास कार्यों पर खर्च करता है, जबकि 25.10 प्रतिशत गैर-विकास खर्च में जाता है। शेष राशि कर्ज भुगतान, ऋण और अन्य मदों में खर्च होती है। राज्य की आय विभिन्न करों और गैर-कर स्रोतों से आती है, जिनमें स्टेट जीएसटी, स्टाम्प शुल्क, वाहन कर, बिजली शुल्क, व्यावसायिक कर और अन्य शुल्क शामिल हैं।
मार्च 2024 के अंत तक राज्य का कुल सार्वजनिक कर्ज 3.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका था और इसके आगे भी बढ़ने का अनुमान है, जिसे सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला बजट रोजगारमुखी, जनकल्याणकारी और सामाजिक प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए, साथ ही खर्च की स्पष्ट और संतुलित नीति अपनाना जरूरी होगा, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहे।




