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संगमरमर की नगरी मकराना में अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमण का शुभागमन

-मकरानावासियों ने अपने आराध्य का किया भावभीना स्वागत,-मकरानावासियों ने दी भावनाओं को अभिव्यक्ति

-स्थानीय विधायक आदि गणमान्यों ने आचार्यश्री का किया अभिनंदन

14.01.2026, बुधवार, मकराना, डीडवाना-कुचामण (राजस्थान) :जन-जन के मानस को आध्यात्मिक अभिसिंचन प्रदान करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी बुधवार को अपनी धवल सेना के साथ राजस्थान के मकराना नगर में पधारे तो सबसे पुराने और विशिष्ट प्रकार के संगमरमर के लिए प्रसिद्ध मकराना नगरी आलोकित हो उठी। सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले संगमरमर की नगरी में महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी का शुभागमन जन-जन को आह्लादित बनाने वाला था। मकरानावासी मानवता के मसीहा का स्वागत कर मानों स्वयं को धन्य बना रहे थे। आचार्यश्री के स्वागत में उपस्थित जनसमूह में संप्रदाय का भेद गौण बना हुआ था। जैन और अजैन सभी महातपस्वी आचार्यश्री के दर्शन से लाभान्वित हो रहे थे। आचार्यश्री भी अपने दोनों करकमलों से आशीषवृष्टि करते हुए मकराना में स्थित सामुदायिक भवन में पधारे।

मकराना की धरा पर आयोजित मंगल प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित जनता को महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के मन में दुःखमुक्ति की भावना रह सकती है। बुढ़ापा, बीमारी तथा जन्म-मृत्यु भी दुःख होते हैं। शारीरिक और मानसिक दुःख के रूप में सारे दुःखों को समाहित कर सकते हैं। आदमी के शरीर में कभी कोई बीमारी के रूप में दुःख होता है। कभी-कभी आदमी को किसी बात को लेकर, किसी विषय को लेकर मन में भी कष्ट हो सकता है, दुःख होता है, वह मानसिक कष्ट होता है। इन दोनों प्रकार के दुःखों से छुटकारा पाने के लिए आदमी को स्वयं का निग्रह करने अर्थात संयम करने की प्रेरणा प्रदान की गई। आदमी को आत्मानुशासन करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में आत्मानुशासन हो तो कभी हद तक दुःखों से छुटकारा हो सकता है।

अणुव्रत में भी कहा गया है कि अपने से अपना अनुशासन करने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए आदमी को अपनी वाणी का संयम करने का प्रयास करना चाहिए। कई बार वाणी के असंयम से कठिनाई की स्थिति बन सकती है। आदमी को कटु बोलने से बचने का प्रयास करना चाहिए। इसी प्रकार आदमी को अपने शरीर का अनुशासन भी रखने का प्रयास करना चाहिए। अपनी इन्द्रियों का भी उचित रूप में संयम रखने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने कहा कि आज मकराना में आना हो गया है। यहां के सभी लोगों में धार्मिक भावना, सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का प्रभाव बना रहे। आचार्यश्री ने लोगों को थोड़ी देर के लिए प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी कराया। साध्वीप्रमुखाजी ने उपस्थित जनता को उद्बोधित किया।

आचार्यश्री के स्वागत में मकराना तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कोठारी व श्री नरेश भण्डारी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। मकराना तेरापंथ समाज ने सामूहिक रूप में स्वागत गीत का संगान किया। स्थानीय विधायक श्री जाकिर हुसैन गेसावत ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्वेताम्बर जैन संघ की महिलाओं ने भी गीत को प्रस्तुति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल ने अपनी प्रस्तुति दी।

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