
सूरत।व्यापारियों द्वारा समय पर GST रिटर्न दाखिल नहीं करने की स्थिति में उनका GST पंजीकरण (GST नंबर) रद्द कर दिया जाता है। हालांकि, कई मामलों में ऐसा देखने को मिला कि व्यापारी जब टैक्स, ब्याज और पेनल्टी के साथ लंबित GST रिटर्न भरने के लिए तैयार हो जाते हैं, तब भी उनका GST नंबर तुरंत बहाल नहीं किया जाता। इस वजह से परेशान व्यापारियों ने Gujarat High Court में रिट याचिका दायर की थी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि व्यापारी सभी बकाया GST रिटर्न दाखिल कर देता है और टैक्स, ब्याज व दंड की पूरी राशि का भुगतान करता है, तो उसका रद्द किया गया GST नंबर तत्काल प्रभाव से चालू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही व्यापारी को लिखित में यह भी आश्वासन देना होगा कि भविष्य में यदि GST से संबंधित कोई भी अतिरिक्त देयता निकलती है, तो वह उसका भुगतान करने के लिए तैयार रहेगा।
अदालत ने यह भी माना कि GST नंबर रद्द होने के बाद, भले ही व्यापारी सभी बकाया राशि चुका दे, फिर भी नंबर बहाल कराने के लिए उसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जो अनुचित है। इसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानियों से तंग आकर कई व्यापारियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
गौरतलब है कि GST लागू होने के बाद पिछले लगभग सात वर्षों तक व्यापारियों को अपेक्षाकृत कम परेशानियों का सामना करना पड़ा था। लेकिन बीते एक साल से GST राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के चलते जांच और कार्रवाई तेज होने से व्यापारियों में “इंस्पेक्टर राज” की वापसी को लेकर असंतोष और चिंता बढ़ती जा रही है। हाईकोर्ट का यह आदेश व्यापारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।



