
सूरत। नायलॉन यार्न पर मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस (MIP) और एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर सूरत के टेक्सटाइल उद्योग में गहरी चिंता व्याप्त है। वीवर्स संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्रीय बजट 2026-27 में नायलॉन यार्न पर MIP या एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई, तो इससे टेक्सटाइल उद्योग को भारी नुकसान होगा, जबकि स्पिनर्स को अनुचित लाभ मिल जाएगा।
सूरत के प्रमुख वीवर नेता और नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने इस संबंध में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर नायलॉन यार्न पर किसी भी प्रकार का आयात प्रतिबंध या अतिरिक्त शुल्क न लगाने की मांग की है। साथ ही, आगामी बजट में वीवर्स और निटर्स को मौजूदा मंदी से उबारने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं घोषित करने का आग्रह भी किया गया है।
वीवर्स नेताओं का कहना है कि स्थानीय स्पिनर्स यार्न उपभोक्ताओं की मांग को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते उद्योग को आयातित यार्न पर निर्भर रहना पड़ता है। आयातित नायलॉन यार्न की गुणवत्ता बेहतर होती है, जो हाई-स्पीड मशीनों पर सुचारु रूप से चलता है और कपड़े की गुणवत्ता भी उच्च स्तर की रहती है। इसके अलावा, आयातित यार्न की कीमतें भी कई बार स्थानीय यार्न की तुलना में प्रतिस्पर्धी होती हैं।
नायलॉन वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मयूर चेवली और वेड रोड वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्र छावला ने वित्त मंत्री को भेजी गई संयुक्त प्रस्तुति में बताया कि 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले वे अपनी सिफारिशें और सुझाव रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग घटने के कारण सूरत, जो एमएमएफ टेक्सटाइल का हब है, सहित पूरा टेक्सटाइल उद्योग गंभीर मंदी से गुजर रहा है।
कई यूनिटें सप्ताह में केवल चार दिन ही चल पा रही हैं। यदि MIP या एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू की गई, तो आयातित यार्न की कीमतों में वृद्धि होगी, जिससे यार्न की उपलब्धता प्रभावित होगी। इसका सीधा असर छोटे और मध्यम वीवर्स पर पड़ेगा, जिन्हें अपनी यूनिटें बंद करनी पड़ सकती हैं। इससे हजारों कारीगर बेरोजगार हो जाएंगे और वीविंग की लाखों मशीनें बेकार हो जाने का खतरा पैदा हो जाएगा।
वीवर्स संगठनों ने सरकार से मांग की है कि देश के लाखों वीवर्स, निटर्स और कारीगरों की आजीविका को सुरक्षित रखने तथा भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए नायलॉन यार्न पर किसी भी प्रकार का आयात शुल्क न लगाया जाए और उद्योग को सहारा देने वाली ठोस योजनाएं बजट में शामिल की




