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1 अप्रैल 2025 से पार्टनरशिप फर्म व LLP के लिए बड़ा टैक्स बदलाव

सेक्शन 194T के तहत पार्टनर्स को भुगतान पर 10% TDS अनिवार्य

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से पार्टनरशिप फर्म और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के लिए आयकर कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया है। आयकर अधिनियम के नए सेक्शन 194T के तहत अब पार्टनर्स को किए जाने वाले कुछ भुगतानों पर 10 प्रतिशत TDS काटना अनिवार्य कर दिया गया है।
नए प्रावधान के अनुसार यदि कोई पार्टनरशिप फर्म या LLP अपने किसी पार्टनर को पूरे वित्त वर्ष में ₹20,000 से अधिक का भुगतान करती है, तो उस भुगतान पर TDS काटना होगा। यह नियम सैलरी, रेम्यूनरेशन, ब्याज, कमीशन और बोनस जैसे भुगतानों पर लागू होगा। TDS भुगतान के समय या खाते में क्रेडिट के समय, जो भी पहले हो, काटना अनिवार्य रहेगा।
हालांकि, यदि कोई पार्टनर अपने कैपिटल अकाउंट से राशि निकालता है, तो उस पर सेक्शन 194T लागू नहीं होगा। यानी कैपिटल विदड्रॉल पर TDS नहीं काटा जाएगा।
इस नए प्रावधान को लागू करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी पर रोक लगाना है। अब तक कई फर्में अपने मुनाफे को कम दिखाने के लिए पार्टनर्स को सैलरी या रेम्यूनरेशन देकर फर्म का प्रॉफिट घटा देती थीं, जिससे उन्हें 30 प्रतिशत की दर से कम टैक्स देना पड़ता था। नए नियम के बाद इस तरह की टैक्स प्लानिंग पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
इस बदलाव से पार्टनरशिप फर्म और LLP पर अनुपालन (Compliance) का बोझ बढ़ेगा। अब उन्हें
TAN नंबर लेना होगा,समय पर TDS सरकार के खाते में जमा करना होगा,और TDS रिटर्न फाइल करना अनिवार्य होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, फर्मों को मार्च 2026 से पहले अपने पार्टनर्स के खातों का सेटलमेंट कर लेना चाहिए, ताकि समय पर TDS कटौती और जमा की जा सके तथा किसी भी प्रकार की पेनल्टी से बचा जा सके।
— सीए अभिषेक अग्रवा

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