
सूरत।द सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 को सायं 5:30 बजे, समृद्धि, नानपुरा, सूरत में “Mediation Act and Its Importance for the Disputes among Industries & Businesses” विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की माननीय सेवानिवृत्त जज डॉ. दीप्ति मुकेश ने उद्योगपतियों और प्रोफेशनल्स को विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।
डॉ. दीप्ति मुकेश ने कहा कि वर्तमान न्याय प्रणाली अत्यंत समयसाध्य हो गई है, जिससे न्याय में देरी हो रही है। जैसे-जैसे कानूनी जागरूकता बढ़ी है, वैसे-वैसे विवादों और मामलों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 40 और भाग-9 में वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रियाओं को मान्यता दी गई है, लेकिन दुर्भाग्यवश इन प्रावधानों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। अब समय आ गया है कि हम अपनी मूल अवधारणाओं की ओर लौटें।
उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने आए विभिन्न संकटों—जैसे जनसंख्या वृद्धि, बुनियादी ढांचे की कमी, राजनीतिक मतभेद, देश विभाजन और युद्ध—का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कारणों से न्यायिक सुधारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सका। औद्योगिक और हरित क्रांति के बाद विवादों की प्रकृति और संख्या दोनों बढ़ीं, लेकिन उसी अनुपात में न्यायिक ढांचा विकसित नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप, मामलों की संख्या बढ़ती गई जबकि अदालतों की संख्या लगभग स्थिर रही।
डॉ. मुकेश ने बताया कि वर्ष 1987 में लागू ‘लीगल सर्विसेज अथॉरिटी एक्ट’ के माध्यम से पहली बार Alternative Dispute Resolution (ADR) प्रणाली को औपचारिक मान्यता मिली। ADR और मेडिएशन के माध्यम से अदालत के बाहर विवादों का समाधान संभव है, जिससे समय, धन और मानसिक तनाव की बचत होती है।
कार्यक्रम में चैंबर के मानद कोषाध्यक्ष सीए मितिष मोदी ने स्वागत भाषण दिया। लॉ एंड कंप्लायंस कमिटी के चेयरमैन एडवोकेट अजय मेहता ने सत्र का संचालन किया। ग्रुप चेयरमैन डॉ. अनिल सरावगी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि मैनेजिंग कमिटी सदस्य श्री अरविंद बाबावाला ने वक्ता का परिचय कराया।




