
अहमदाबाद। मुंबई के हीरा उद्योग को पीछे छोड़ने के दावों के साथ दो वर्ष पहले शुरू किया गया सूरत डायमंड बोर्स अभी तक पूरी तरह कार्यरत नहीं हो सका है। लगभग पाँच वर्ष पहले यहां कार्यालयों की बुकिंग शुरू हुई थी और दो वर्ष पूर्व इसका भव्य उद्घाटन किया गया था। वर्ष 2023 में 17 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरत डायमंड बोर्स का उद्घाटन किया था, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप यहां कारोबार प्रारंभ नहीं हो पाया।
सूत्रों के अनुसार, कई व्यापारियों ने यहां कार्यालय खरीदे हैं, लेकिन वे अभी यहां से व्यापार करने के इच्छुक नहीं हैं। यह अत्यंत विशाल और आधुनिक 15 मंजिला भवन है, जिसमें लगभग 4,200 कार्यालय बनाए गए हैं। करीब 3,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह भवन ड्रीम सिटी परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, फिर भी यहां गतिविधियां सीमित बनी हुई हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में यहां केवल लगभग 50 कार्यालय ही संचालित हो रहे हैं। बोर्स की समिति से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आने वाले वर्ष में अधिक कार्यालय शुरू हों और हीरा व्यापारी यहां से व्यापार करें, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
सूरत के महिधरपुरा क्षेत्र में ही लगभग 200 बड़े हीरा व्यापारी तथा करीब 2,000 छोटे-बड़े व्यापारी कार्यरत हैं, जो वर्तमान में वहीं से अपना व्यवसाय चला रहे हैं। तत्कालीन गृह राज्य मंत्री और वर्तमान नायब मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पूर्व में व्यापारियों के साथ बैठकें कर उन्हें डायमंड बोर्स में स्थानांतरित होने का आग्रह भी किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त हवाई संपर्क सुविधा के अभाव के कारण सूरत डायमंड बोर्स अपेक्षित रूप से सक्रिय नहीं हो पाया है। रत्न एवं आभूषण संवर्धन परिषद द्वारा अंतरराष्ट्रीय संपर्क और कार्गो सुविधा उपलब्ध कराने की मांग विमानपत्तन प्राधिकरण के समक्ष र



