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सुख का राग मनुष्य को पापी बना देता है और सुख का वियोग उसे- पागल कर देता है-”आचार्य श्री विजयपद्मदर्शनसूरिजी

वेसु स्थित आराधना भवन में आचार्य श्री विजयपद्मदर्शनसूरिजी महाराज का प्रेरक प्रवचन

सूरत। वेसु स्थित पूज्य आचार्य श्री ओंकारसूरिजी आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में पूज्य आचार्य श्री विजयपद्मदर्शनसूरिजी महाराज ने वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और मानसिक परिस्थितियों पर गहन प्रकाश डालते हुए कहा कि “सुख का राग मनुष्य को पापी बना देता है और सुख का वियोग उसे पागल कर देता है।”
उन्होंने कहा कि सुख अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन सुख में अत्यधिक आसक्ति खतरनाक साबित होती है। आज शहरी समाज, धनाढ्य वर्ग और शिक्षित लोग सुख के प्रति अत्यंत आसक्त हो गए हैं।
आचार्य श्री ने कहा कि गांवों को तोड़कर शहर बसाए गए, छोटे व्यापारियों को मॉल संस्कृति और ऑनलाइन व्यापार ने बुरी तरह प्रभावित किया। जिन व्यवसायों में लोगों की वर्षों की मेहनत और पकड़ थी, उन्हें कुछ तत्वों द्वारा छीना जा रहा है। इससे व्यापारी वर्ग गहरी मानसिक उलझन और असुरक्षा में जी रहा है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि वैश्विक मंदी के कारण डायमंड और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख उद्योग आज वेंटिलेटर पर हैं। हीरा बाजार अपनी चमक खो चुका है, ओरिजिनल के बजाय इमिटेशन का बोलबाला है, जिससे प्राकृतिक और पारंपरिक व्यवसाय संकट में आ गए हैं।
आचार्य श्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक वैश्विक स्तर पर हिंसा का वातावरण शांत नहीं होगा, तब तक मंदी, महंगाई और आर्थिक संकट चलता रहेगा।
उन्होंने जीवन में संतोष का महत्व बताते हुए कहा कि जो मिला है उसमें संतुष्ट रहें, दूसरों के आलीशान बंगले या हाई-फाई फ्लैट देखकर दुखी न हों। सादगी में भी खुशी संभव है।
प्रवचन के अंत में उन्होंने साहस और आत्मविश्वास पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग जीवन में हिम्मत और ‘डेरिंग पावर’ विकसित करते हैं, वे हारी हुई बाजी को भी जीत में बदल सकते हैं। परिस्थितियों से लड़ना भी एक बड़ी साधना है।
उन्होंने विश्वास दिलाया कि चाहे सब कुछ चला जाए, लेकिन भाग्य को कोई नहीं बदल सकता। यदि भीतर प्रभु विराजमान हैं, तो पूरी दुनिया आपके साथ है

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