प्रत्येक कार्य में हो ध्यान का जुड़ाव : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण
मानवता के मसीहा के अभिनंदन में उमड़ा सकल जैन-अजैन समाज

ज्योतिचरण का स्पर्श पा चमक उठी खिंवाड़ा की धरती,
-14 कि.मी. का विहार कर महातपस्वी महाश्रमण का खिंवाड़ा में पदार्पण
-एकदिवसीय प्रवास हेतु तेरापंथ भवन में पधारे तेरापंथाधिशास्ता
–खिंवाड़ावासियों ने अपने आराध्य के अभिनंदन में दी भावनाओं को अभिव्यक्ति
08.12.2025, सोमवार, खिंवाड़ा, पाली (राजस्थान) :राजस्थान के मारवाड़ संभाग के पाली जिले को पावन बनाने के लिए गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अखण्ड परिव्राजक, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने सोमवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में मगरतलाब से मंगल प्रस्थान किया। वातावरण में शीतलता व्याप्त थी, किन्तु अपने आराध्य के साथ गतिमान श्रद्धालुओं में महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्रवाहित हो रही थी। मार्ग में स्थान-स्थान पर ग्रामीण जनता को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए आचार्यश्री अगले गंतव्य की ओर गतिमान थे। कहीं-कहीं विद्यार्थियों आदि को भी आचार्यश्री के आशीष का लाभ प्राप्त हुआ। एक स्थान पर पुलिस-प्रशासन से जुड़े अधिकारियों व अन्य पुलिसकर्मियों ने भी आचार्यश्री के दर्शर कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

आज आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ ख्ंिावाड़ा की ओर गतिमान थे। राष्ट्रसंत आचार्यश्री महाश्रमणजी के आगमन का प्रसंग खिंवाड़वासियों को उत्साह व उमंग से ओतप्रोत बना रहा था। खिंवाड़ा के उत्साही श्रद्धालु दूर मार्ग में पहुंचकर ही शांतिदूत के दर्शन कर उनके पदचिन्हों का अनुगमन करने लगे थे। खिंवाड़ा गांव में मानों कोई उत्सव का माहौल छाया हुआ था। जहां जैन एवं जैनेतर का भेद कर पाना कठिन था।
करीब चौदह किलोमीटर का विहार कर महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी जैसे ही खिंवाड़ा गांव की सीमा के निकट पधारे तो वहां आचार्यश्री की प्रतीक्षा खड़े सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जनता ने बुलंद जयघोष से अभिनंदन किया। अपने दोनों करकमलों से आशीषवृष्टि करते हुए आचार्यश्री खिंवाड़ा गांव के अंदर की ओर पधारे। मार्ग में एक स्थान पर श्रीराम चौक से खिंवाड़ा कृषि मण्डी की ओर जाने वाले मार्ग का नामकरण ‘आचार्यश्री महाश्रमणजी मार्ग’ किया गया था। जिसके पट्ट के अनावरण का प्रसंग था। आचार्यश्री ने वहां पधारकर मंगलपाठ का उच्चारण किया और संबद्ध लोगों ने उस पट्ट का अनावरण किया। भव्य स्वागत जुलूस के साथ आचार्यश्री खिंवाड़ा में स्थित तेरापंथ भवन में पधारे।

यहां बने ‘महावीर भिक्षु समवसरण’ में आयोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित जनता को शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि ध्यान दुनिया में प्रसिद्ध है। दुनिया में अनेक नामों से ध्यान-योग की पद्धतियां संचालित हैं। ध्यान का मानव जीवन में बहुत महत्त्व है। जैसे शरीर में शीर्ष का महत्त्व है और वृक्ष में मूल का महत्त्व होता है, उसी प्रकार साधु धर्म में ध्यान का महत्त्व होता है। चित्त की एकाग्रता और स्थिरता है तो कार्य अच्छा हो सकता है। एकाग्रता है तो कोई भी कार्य अच्छा हो सकता है। आदमी जो भी कार्य करता है, उसका उसी कार्य में रहे तो वह भी ध्यान हो जाता है। किसी भी कार्य में एकाग्रता रहे तो वह कार्य सफल बन सकता है। आदमी को अपने जीवन में ध्यान का अभ्यास करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को प्रत्येक कार्य के साथ ध्यान को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री ने सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की भी मंगल प्रेरणा प्रदान करते हुए समुपस्थित जनता व विद्यार्थियों को सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति के संकल्प स्वीकार कराए। आचार्यश्री ने कहा कि हमारा पहले भी खिंवाड़ा आना हुआ था और आज आना भी हो गया। आचार्यश्री तुलसी भी खिंवाड़ा पधारे थे। खिंवाड़ा में धर्म-अध्यात्म का प्रभाव रहे, मंगलकामना।

आचार्यश्री के स्वागत में खिंवाड़ा के तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री महेन्द्र खांटेड़ व निवर्तमान अध्यक्ष श्री अमृतलाल खांटेड़ ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल की सदस्याओं ने स्वागत गीत का संगान किया। पाली के पूर्व विधायक श्री ज्ञानचंद पारख ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सरपंच श्री श्रीपाल वैष्णव, एसडीएम श्रीमती शिवाश जोशी, व्यापार मण्डल अध्यक्ष श्री कांति सुथार, महेन्द्र बोहरा आदि ने भी आचार्यश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।




