“मनुष्य को चिंता नहीं, चिंतन करना चाहिए-संत कृपाराम महाराज
रामजन्मोत्सव पर सूरत बना अयोध्या धाम,दीपों की रोशनी, पुष्पवर्षा और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ कथा पंडाल

सूरत। सूरत में आयोजित श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस बुधवार को भक्ति, प्रेम और वैराग्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामजन्मोत्सव के अवसर पर पूरा कथा पंडाल दीपों की रोशनी, पुष्पवर्षा और भजन-कीर्तन से आलोकित हो उठा। श्रद्धालुओं की अपार आस्था और जयघोषों के बीच सूरत नगरी मानो अयोध्या धाम में परिवर्तित हो गई।
संत कृपाराम महाराज के पावन मुखारविंद से प्रवाहित अमृतमयी वाणी ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। कथा पंडाल भक्तों से खचाखच भरा रहा और वातावरण “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष से गूंजता रहा।
अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुए संत कृपाराम महाराज ने कहा,
“मनुष्य को चिंता नहीं, चिंतन करना चाहिए। चिंता मन को कमजोर करती है, जबकि चिंतन जीवन को सही दिशा देता है।”
उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति ईश्वर स्मरण और आत्मचिंतन में लीन होता है, तब जीवन की अनेक समस्याएं स्वतः ही समाप्त होने लगती हैं।

महाराज ने आगे कहा कि भगवान प्रेम से आते हैं और ईश्वर के यहां प्रेम की ही प्रधानता है। जहां श्रद्धा, समर्पण और प्रेम होता है, वहीं प्रभु स्वयं प्रकट होते हैं। भगवान श्रीराम केवल एक राजा नहीं, बल्कि प्रेम, मर्यादा और करुणा के सजीव स्वरूप हैं।
कथा के दौरान संत श्री ने वाल्मीकि रामायण के संदर्भ में भगवान श्रीराम के अवतार के पांच प्रमुख कारणों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि धर्म की पुनः स्थापना, अधर्म और अन्याय का विनाश, भक्तों की रक्षा, मर्यादित एवं आदर्श जीवन का उदाहरण प्रस्तुत करना तथा मानव समाज को प्रेम, त्याग और कर्तव्य का मार्ग दिखाने के लिए प्रभु श्रीराम का अवतार हुआ।
रामजन्म का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल दीपों से जगमगा उठा। पुष्पवर्षा के साथ भजन-कीर्तन आरंभ हुआ, श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे और वातावरण पूर्णतः भक्तिरस में डूब गया। चारों ओर भगवा ध्वज लहराने लगे और राम नाम के जयकारों से पूरा परिसर राममय हो गया।

श्रीराम कथा का यह चतुर्थ दिवस श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। संत कृपाराम महाराज की ओजस्वी वाणी और प्रभु श्रीराम की दिव्य लीलाओं ने भक्तों के जीवन में भक्ति, प्रेम और सकारात्मक चिंतन का गहन संदेश प्रदान किया।




