ज्ञानवर्धन का निमित्त बने यह महाचरण : अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमण
भिक्षु चेतना वर्ष महाचरण : के अंतिम दिन भिक्षु स्वामी की तर्क संपदा पर हुई चर्चा

-साध्वीप्रमुखाजी ने भी जनता को किया उद्बोधित
-कंटालियावासियों ने दी भावनाओं को अभिव्यक्ति, प्राप्त किया आशीर्वाद
27.12.2025, शनिवार, कंटालिया, पाली (राजस्थान) :जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली कंटालिया में ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ के महाचरण तथा तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी के तेरह रात्रि प्रवास का अंतिम दिन।
रावले में बने भव्य ‘भिक्षु समवसरण’ में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी आदि साध्वी समुदाय ने गीत का संगान किया। आज के निर्धारित विषय ‘आचार्य भिक्षु की तर्क संपदा’ पर साध्वी ऋद्धिप्रभाजी ने अपनी अभिव्यक्ति दी।

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि धर्म का प्रज्ञापन तार्किकता के साथ किया जाता है, वह धर्म बौद्धिक जनता के लिए भी स्वीकरणीय बन जाती है। तार्किकता के संदर्भ में कुमारश्रमण केशी और राजा प्रदेशी की कथा को देखा जा सकता है। हेतु से बात को समझाने का प्रयास हो तो किसी को अपनी बात समझाने में आसानी हो सकती है। तर्क के साथ आदमी की निष्ठा भी होनी चाहिए। कोई बात यदि युक्ति संगत लगे तो उसे स्वीकार करने का प्रयास करना चाहिए। यथार्थ के साथ आदमी को रहने का प्रयास करना चाहिए। दुनिया में सभी बात सच नहीं हो सकती, जो झूठ है वह झूठ रहेगा और जो सत्य है, वह सत्य ही रहेगा।

आचार्यश्री भिक्षु ने अपनी तार्किकता थी। आज कंटालिया का तेरहवां दिन है। इतने श्रावक-श्राविकाओं, साधु-साध्वियों व समणियों की उपस्थिति है। गायन और वक्तव्य आदि का भी क्रम चला है। हमने आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के अंतर्गत कंटालिया में जो तेरह दिवसीय कार्यक्रम बनाया था, वह आज पूर्ण हो रही है। महाचरण ज्ञानवर्धन का निमित्त भी बन सकता है। आचार्यश्री ने महाचरण की सम्पन्नता की घोषणा की।

कार्यक्रम में साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने भी जनता को उद्बोधित करते हुए आचार्यश्री से साधु-साध्वियों को बक्सीस प्रदान करने की प्रार्थना की तो आचार्यश्री ने प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि मैं तो बोलने को भी तप मानता हूं। इस प्रकार मान लिया जाए यह यह तपस्या का भी एक क्रम चला है। श्रावक-श्राविकाओं ने इतना सुनने का भी प्रयास किया है। यह महामना भिक्षु स्वामी से जुड़ा हुआ स्थान है। हम सभी अच्छा विकास करते रहें।

साध्वी अणिमाश्रीजी व समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज-कंटालिया ने सामूहिक रूप में गीत को प्रस्तुति दी। डॉ. महेन्द्रसिंह राठौड़, श्री महेन्द्र पोरवाल, श्री राजेश मरलेचा, श्री संदीप मूथा, श्रीमती रूपा सुराणा, श्रीमती सारिका मरलेचा व मंत्री संजय मरलेचा, अध्यक्ष श्री गौतम एम. सेठिया, संयोजक श्री गौतम जे. सेठिया व सुश्री मोक्षिता डागा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मण्डल-कंटालिया ने गीत का संगान किया। भुज ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी प्रस्तुति दी। बालक समर्थ गादिया ने ‘ग्लोबल चेंजर’ ने अपनी पुस्तक श्रीचरणों में अर्पित की। आचार्यश्री ने बालक को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। स्काउट मास्टर श्री चुन्नीलाल चौहान, सरपंच श्री पारसमलजी ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी।



