द्वितीय दिवस भक्तमाल कथा: गर्भावस्था में सत्संग से संतान के संस्कारों का निर्माण

सूरत। डायमंड नगरी सूरत में आयोजित श्री भक्त चरित्र (भक्तमाल) कथा के दूसरे दिन सीरवी समाज भवन भक्ति, श्रद्धा और भावनात्मक वातावरण से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में महिलाओं एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे यह सिद्ध हुआ कि संस्कारों की प्रथम पाठशाला मां ही होती है। संत श्री गोविंदराम जी शास्त्री ने कहा कि गर्भावस्था के समय सत्संग, नाम स्मरण और भगवद् चिंतन का गहरा प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है और ऐसे संस्कार जीवनभर संतान का मार्गदर्शन करते हैं।
कथा में बताया गया कि माता की श्रद्धा, विचार और आचरण ही संतान के चरित्र का निर्माण करते हैं। प्रह्लाद चरित्र के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्चे भक्त की रक्षा के लिए भगवान स्वयं नियम, समय और रूप तक बदल देते हैं तथा अडिग विश्वास से हर संकट दूर हो जाता है।

आयोजन समिति ने जानकारी दी कि 16 दिसंबर से अखिल भारतीय रामस्नेही सम्प्रदायाचार्य पीठ, रामधाम खेड़ापा के आचार्य प्रवर पूज्य श्री पुरुषोत्तमदास जी महाराज का पावन सानिध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा, जिससे कथा को विशेष आध्यात्मिक ऊँचाई मिलेगी। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित हो रही है। संपूर्ण आयोजन श्री सत्संग सेवा समिति, सूरत द्वारा किया जा रहा है।




