धर्मचंद बड़जात्या बने दिगंबर मुनि, मिला नया नाम मुनि श्री स्वात्मसागर जी महाराज

सूरत।सकल जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि प.पू. समाधि सम्राट, युगप्रतिक्रमण प्रवर्तक गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के सुशिष्य तथा पूज्य पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्तीनी श्रमणी आर्यिका श्री 105 विबोध श्री माताजी ससंघ (9 पिच्छी) के पावन सानिध्य में एक ऐतिहासिक दीक्षा संस्कार संपन्न हुआ।
पूज्य पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के मंत्रोच्चार एवं आशीर्वाद से श्रीमान धर्मचंद जी बड़जात्या को विधिवत दिगंबर मुनि दीक्षा प्रदान की गई। दीक्षा उपरांत उनका नवीन नाम मुनि श्री स्वात्मसागर जी महाराज रखा गया।
मुनि श्री स्वात्मसागर जी महाराज वर्तमान में कतार गांव स्थित जैन मंदिर में विराजमान हैं। उनके पिता स्वर्गीय श्री जगन्नाथ जी बड़जात्या थे। उनके पुत्र श्री विजय, श्री राकेश, श्री मनोज, श्री मनीष एवं समस्त परिवार की पूर्ण सहमति एवं अनुमोदन से यह दीक्षा संस्कार संपन्न हुआ।यह दीक्षा न केवल बड़जात्या परिवार बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए आत्मकल्याण और धर्म प्रभावना का प्रेरणादायी प्रसंग है।




