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“अपेक्षाओं में उलझा मनुष्य मुक्त नहीं हो सकता”-आचार्य पद्मदर्शनसूरीजी

अठवालाइंस जैन श्वेतांबर मूर्ति–पूजक संघ में धर्मसभा:

अठवालाइंस जैन श्वेतांबर मूर्ति–पूजक संघ में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैनाचार्य पूज्य पद्मदर्शनसूरीजी महाराज ने जीवन, समाज और संस्कारों पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि “अपेक्षाओं की जंगल में फँसा व्यक्ति किसी भी प्रकार बाहर नहीं निकल सकता। अपेक्षाएँ छोड़ देंगे तभी शांति संभव है।”उन्होंने आगे कहा कि आज सरकार निरक्षरों के लिए साक्षरता अभियान तथा गंदगी हटाने के लिए स्वच्छता अभियान चला रही है, परंतु एक बड़ा प्रश्न यह है कि साक्षर लोगों ने क्या किया? पहले अशिक्षित व्यक्तियों में दया, लज्जा, शरम और संवेदना जैसे गुण विद्यमान थे, किंतु आज इन गुणों का क्षय होता दिखाई दे रहा है।

आचार्यश्री ने आधुनिक राजनीति और समाज पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले के राजा अपने प्रजाजनों में गुप्त वेश में जाकर उनकी समस्याएँ सुनते थे, जबकि आज नेता और अधिकारी ज़ेड–प्लस सुरक्षा में घिरे रहते हैं, जिससे वे आमजन से दूर होते जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि “बाहर का कचरा सभी को दिखाई देता है, लेकिन भीतर का कचरा—राग, द्वेष, क्रोध और कषाय—किसी को नजर नहीं आता। इसे हटाना आवश्यक है।”
दान–पुण्य के बढ़ते प्रवाह की सराहना करते हुए आचार्यश्री ने चिंता व्यक्त की कि “पाप को पाप मानने की प्रवृत्ति आज कम होती जा रही है, यही देश का दुर्भाग्य है।” युवाओं में स्वच्छंदता बढ़ने और बड़ों की मर्यादा न मानने को भी उन्होंने गंभीर विषय बताया।

अठवालाइंस जैन संघ की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि संघ में आतिथ्य, अभिषेक, जिणवाणी श्रवण तथा संतों की सेवा–साधना का अत्यंत अद्भुत और अनुकरणीय वातावरण है। संघ वऱ्षों से सेवा, व्रत–धर्म और व्रीयावच्च में अग्रणी रहा है।धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक–श्राविकाओं ने उपस्थित रहकर आचार्यश्री के उपदेशों का लाभ लिया।

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