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त्याग व संयम से सुख की प्राप्ति संभव : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

-दर्शन को उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भुवाणा के महाप्रज्ञ विहार में हुआ पावन प्रवास

 -उदयपुर के दूसरे दिन के प्रवास के लिए महातपस्वी ने किया 7 कि.मी. का विहार

-उदयपुर की जनता में धार्मिकता का भाव बने रहने का दिया मंगल आशीष

-साध्वीप्रमुखाजी ने उदयपुरवासियों को किया उद्बोधित

-उदयपुरवासियों ने अपने आराध्य की अभिवंदना में दी भावनाओं को अभिव्यक्ति

25.11.2025, मंगलवार, भुवाणा, उदयपुर (राजस्थान) :जन-जन को आध्यात्मिक आलोक से आलोकित करने वाले, ज्ञानगंगा प्रवाहित करने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ झीलों की नगरी उदयपुर में त्रिदिवसीय प्रवास हेतु पधार गए हैं। उदयपुर प्रवास के दूसरे दिन महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी प्रातःकाल बलीचा स्थित तुलसी निकेतन विद्यालय (छात्रावास) से गतिमान हुए। सर्दी के मध्य गतिमान महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी मानों मेवाड़ की हृदयस्थली उदयपुर में गतिमान थे। चारों दिशाओं से आने वाला भक्तों का समूह मानवता के मसीहा के दर्शन से लाभान्वित हो रहा था। लगभग चौदह वर्षों से अपने आराध्य की बांट जोहने वाला शहर व शहरवासी अपने आराध्य के चरणरज से निहाल हो रहे थे। झीलों की नगरी में मानों अध्यात्म जगत की गंगा प्रवाहित हो रही थी। ज्ञातव्य है कि सोमवार की रात्रि में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भारत के लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिड़ला दर्शनार्थ उपस्थित हुए। कुछ समय बाद ही मेवाड़ राजघराने के श्री लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने भी आचार्यश्री के दर्शन से लाभान्वित हुए।

दर्शन को उमड़े जनसमूह पर अपने दोनों करकमलों से आशीषवृष्टि करते हुए लगभग सात किलोमीटर का विहार कर युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी भुवाणा में स्थित महाप्रज्ञ विहार में पधारे। इस क्षेत्र में वर्ष 2007 में तेरापंथ धर्मसंघ के दसवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने चतुर्मास किया था।महाप्रज्ञ विहार में ही बने भव्य ‘महाश्रमण समवसरण’ में आयोजित आज के मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित विशाल जनमेदिनी को अपनी अमृतमयी वाणी से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी सुख प्राप्त करना चाहता है। आदमी ही नहीं, चराचर जगत के समस्त प्राणी सुख की इच्छा रखने वाले हो सकते हैं। दुःख न आए और सुख की प्राप्ति हो, ऐसी भावना रखते हैं। शास्त्रों में कहा गया कि आदमी को अपने आपको तपाने का प्रयास करना चाहिए। सुविधावादी मनोवृत्ति को छोड़कर कष्ट सहिष्णुता तथा कठोर जीवन जीने की भावना भी होनी चाहिए। जो आदमी सुविधावादी मनोवृत्ति वाला हो जाता है, वह कष्ट से घबराता रहता है, उसके लिए थोड़ी कठिनाई भी बहुत बड़ी लगती है। जिसे कठोर जीवन जीने का अभ्यास होता है, वह जीवन में आने वाले कष्टों का बहुत ज्यादा परवाह नहीं करता। जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है, लेकिन उन कठिनाइयों को सहन करने की मनोवृत्ति का भी विकास करने का प्रयास करना चाहिए।

हमारे साधु-साध्वियां सर्दी, गर्मी और बरसात के मौसम में भी विहार करते हैं। सावधानी रखी जा सकती है, किन्तु कठिनाइयों से डरना नहीं और अपने पथ पर आगे बढ़ते रहने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में जितना त्याग और संयम का विकास होगा, उससे भीतरी सुख की प्राप्ति हो सकती है और जहां राग-द्वेष और असंयम और असहिष्णुता की बात होती है, वहां अशांति और दुःख की प्राप्ति हो सकती है। जहां योग, त्याग और संयम हो, वहां सुख की प्राप्ति संभव हो सकती है।

आचार्यश्री ने आगे कहा कि परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने यहां वर्षावास किया था। उदयपुर शहर में आना हुआ है। लोगों में भक्ति-भावना बनी रहे। इतनी विराट परिषद उपस्थित है। पुराने क्षेत्र में मैं, साध्वीप्रमुखाजी, मुख्यमुनिश्री व साध्वीवर्या नए-नए रूप में आए हैं। मुनिश्री मधुकरजी स्वामी से जुड़ा हुआ स्थान है। यहां की जनता में धार्मिक भावना बनी रहे।

आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने उदयपुर की जनता को उद्बोधित किया। तेरापंथी सभा-उदयपुर के अध्यक्ष श्री कमल नाहटा, श्री अभिषेक पोखरना व श्री अशोक चोरड़िया ने अपनी अभिव्यक्ति दी। उदयपुर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तेरापंथ युवक परिषद-उदयपुर ने गीत के माध्यम से अपने आराध्य की अभिवंदना की। तेरापंथ कन्या मण्डल व तेरापंथ महिला मण्डल ने भी पृथक्-पृथक् गीत को प्रस्तुति दी। श्री बजरंगजी जैन आदि लोगों ने भी गीत को प्रस्तुति दी।

अनेक गणमान्यों ने श्रीचरणों में उपस्थित होकर प्राप्त किया आशीर्वाद

श्री प्रमोद सामर ने आचार्यश्री के दर्शनार्थ उपस्थित गणमान्यों नागरिकों का परिचय प्रदान किया। राजस्थान विद्यापीठ के चांसलर श्री शिवसिंह सारंगदेव, मोहनलाल सुखाड़िया युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर श्री वीपी सारस्वत, मावली के प्रधान श्री नरेन्द्र जैन, फतेहनगर नगरपालिका के उपाध्यक्ष श्री नितीन सेठिया, कोटा युनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर श्री एम.एल. कालरा, राजकोट विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर श्री मेधावीलाल शर्मा, उदयपुर शहर जिले के अध्यक्ष श्री गजपाल सिंह राठौड़, उपाजिलाप्रमुख श्री पुष्कर तेली, सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष श्री शांतिलाल बेलावत, पूर्व जिलाप्रमुख श्रीमती वंदना मीणा, सहकार संघ के उपाध्यक्ष श्री किरण नागौरी, राजसमंद के पूर्व विधायक श्री बंसीलाल खटिक, गिरवा के पूर्व प्रधान श्री तखतसिंह, नगरविकास प्रन्यास के पूर्व अध्यक्ष श्री रविन्द्र श्रीमाली, वात्सल्य समिति के अध्यक्ष श्री प्रकाश अग्रवाल, कृषि विश्वविद्यालय-उदयपुर के पूर्व वाइस चांसलर श्री उमाशंकर शर्मा, उदयपुर के पूर्व जिलाप्रमुख श्री शांतिलाल मेघवाल, बोहरा समाज के अध्यक्ष श्री सब्बीर हुसैन बोहरा तथा बड़गांव की प्रधान श्रीमती प्रतिभा नागदा व श्री ओपी जैन तथा श्रीमाली समाज के अध्यक्ष श्री दिग्विजय श्रीमाली आदि ने आचार्यश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

शांतिदूत की सन्निधि में पहुंचे मेवाड़ के संरक्षक महाराणा श्री विश्वराजसिंह

सायंकाल मेवाड़ के वर्तमान संरक्षक महाराणा श्री विश्वराजसिंह मेवाड़ अपने परिजन व सरदारों तथा उमरावों के साथ शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में पहुंचे। उन्होंने आचार्यश्री को भक्तिपूर्वक वंदन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यश्री का उनके साथ संक्षिप्त वार्तालाप भी हुआ। कुछ समय तक आचार्यश्री की मंगल सन्निधि प्राप्त कर वे पुनः आचार्यश्री को वंदन कर अपने गंतव्य को प्रस्थान किया।

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