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सूरत में भाड़ा विवाद गहराया: मंडप क्लॉथ एसोसिएशन पुराने नियम पर अडिग

एसोसिएशनों ने कहा— व्यापार दबाव से नहीं, संवाद और सम्मान से चलता है

निटर्स का 2.10 रुपये का नया प्रस्ताव, ट्रेडर्स बोले– समाधान आने तक लोकल खरीदी बंद

व्यापारी संगठनों की एकजुटता, गलत फरमान का विरोध तेज

सूरत। स्थानीय भाड़े में 0.35 पैसे बढ़ाकर 2.10 पैसे करने के निटर्स के निर्णय ने शहर के कपड़ा व्यापार में हलचल पैदा कर दी है। सूरत मंडप क्लॉथ एसोसिएशन (SMCA), सूरत निटिंग ट्रेडर्स एसोसिएशन (SKTA) और ब्रोकर समुदाय— तीनों ने अपनी बैठक व विचार-विमर्श के बाद स्पष्ट कर दिया है कि व्यापार एकतरफा निर्णयों से नहीं चलता और जब तक सर्वसम्मति से कोई ठोस समाधान नहीं आएगा, तब तक व्यापारी पुराने नियम पर ही टिके रहेंगे तथा लोकल माल की खरीदारी फिलहाल बंद रहेगी।

मंडप क्लॉथ एसोसिएशन ने अपने स्पष्ट बयान में कहा कि एसोसिएशन किसी भी दबाव या एकतरफा फैसले के आगे नहीं झुकेगा। उनका कहना है कि व्यापार सम्मान और संतुलन से आगे बढ़ता है, और इसी कारण सभी सदस्यों ने एकमत से निर्णय लिया कि जब तक अंतिम समाधान नहीं निकलता, माल केवल पुराने नियमों से ही खरीदा जाएगा। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा मात्र 0.35 पैसे की बढ़ोतरी का नहीं, बल्कि गलत तरीके से लागू किए गए फरमान का विरोध है। उनकी प्राथमिकता बाजार की स्थिरता और व्यापारियों का हित है।

दूसरी ओर, निटर्स ने स्थानीय भाड़ा 0.35 पैसे बढ़ाकर 2.10 पैसे करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे व्यापारी समूह एकतरफा कदम बता रहा है। इसी प्रस्ताव के बाद मतभेद बढ़े और अन्य एसोसिएशन भी सक्रिय हुए। सूरत निटिंग ट्रेडर्स एसोसिएशन की बैठक में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं— समिति के अनुसार काफी व्यापारी पुराने भाड़े पर खरीदारी के पक्ष में हैं, और अगर कोई निटर सभी व्यापारियों को समान रूप से पुराने भाड़े में माल देने के लिए तैयार हो, तो समाधान निकल सकता है। बैठक में यह भी सामने आया कि मिलों में 50–60% तक माल इनवर्ड हो चुका है, जिसमें लगभग 90% माल सिलवासा का है। एसोसिएशन ने उन व्यापारियों को धन्यवाद दिया जो कठिन परिस्थिति में भी एकजुट खड़े हैं।

ब्रोकर समुदाय ने भी व्यापारियों का समर्थन करते हुए साफ कहा कि यदि व्यापारी एकजुट नहीं रहेंगे, तो वे भी कोई मदद नहीं कर पाएँगे। उनका मानना है कि ग्रे की कमी बढ़ रही है, जिससे व्यापारी पक्ष को नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही हो रहा है। ब्रोकरों ने दोहराया कि गलत निर्णय का विरोध करना आवश्यक है, और जब तक सर्वसम्मति वाला हल नहीं मिलता, किसी भी तरह की जल्दबाज़ी व्यापार के लिए हानिकारक होगी।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच यह तय हो गया है कि जब तक निटर्स, व्यापारियों और एसोसिएशनों के बीच समाधान नहीं निकलता, स्थानीय माल की खरीदी स्थगित रहेगी और पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
व्यापार जगत की नज़र अब संवाद पर टिकी है— क्योंकि सभी पक्ष मानते हैं कि व्यापार की असली मजबूती एकता, संवाद और आपसी सम्मान में ही है।

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