
सूरत। देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक समय हो चुका है, लेकिन फॉर्म में शामिल ‘संतान’ संबंधी विवरण को लेकर मतदाताओं में गहरी दुविधा बनी हुई है। अधिकतर कॉलम सरल होने के बावजूद, पिछले SIR की किन-किन संबंधी जानकारी को दोबारा भरना है, यह मुद्दा अब भी स्पष्ट नहीं हो सका है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया था कि ‘संबंधी’ कॉलम में पिता, काका या पितृवंश के किसी भी सदस्य का विवरण दिया जा सकता है, जिससे माना जा रहा था कि भ्रम दूर हो जाएगा। लेकिन BLO ऐप में उपलब्ध विकल्प इससे भिन्न हैं। कई BLO कर्मियों द्वारा साझा किए गए वीडियो के अनुसार ऐप में ‘संतान’ के रूप में केवल पुत्र, पुत्री, दादा, दादी और ट्रांसजेंडर को जोड़ने की सुविधा है। इस तकनीकी संरचना के कारण मतदाताओं का कहना है कि फॉर्म में मां, नानी और नाना जैसे विकल्पों का दिखाई न देना प्रक्रिया को और जटिल बना रहा है, जबकि नागरिकता सत्यापन में 1987 से 2004 के बीच जन्मे लोगों के लिए माता या पिता — किसी एक का दस्तावेज अनिवार्य माना गया है।
राज्य में पिछला SIR वर्ष 2002 में आयोजित हुआ था और उसका रिकॉर्ड तेलंगाना CEO की वेबसाइट पर उपलब्ध है। जिन लोगों का नाम या संबंधी का विवरण उस सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें इस चरण के बाद आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। चुनाव आयोग ने पहचान और नागरिकता संबंधी सत्यापन के लिए 11 प्रकार के दस्तावेजों को मान्यता दी है, जिनमें सरकारी पहचान पत्र, 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी सरकारी दस्तावेज, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, स्थायी निवासी प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, परिवार रजिस्टर तथा सरकारी जमीन/मकान आवंटन पत्र जैसे दस्तावेज शामिल हैं। आधार के लिए आयोग के 9 सितंबर 2025 के निर्देश यथावत रहेंगे।
SIR प्रक्रिया में ‘संतान’ कॉलम को लेकर जारी यह विरोधाभास— एक ओर BLO ऐप के सीमित विकल्प और दूसरी ओर आयोग के लचीले निर्देश— मतदाताओं की उलझन का प्रमुख कारण बन गया है। मतदाता अब आयोग से स्पष्ट दिशा-निर्देश की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि दस्तावेज सत्यापन और लिंकिंग की प्रक्रिया बिना परेशानी पूरी हो सके।




