मुंबई में कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध का विवाद तेज, जैन साधु 28 नवंबर से दादर कबूतरखाना पर करेंगे विरोध व भूख हड़ताल

मुंबई में कबूतरों को चण (दाना) डालने पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ जैन समुदाय का विरोध उग्र होता जा रहा है। समुदाय की इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे जैन साधु निलेशचंद्र विजय ने 28 नवंबर से दादर कबूतरखाना पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है।
साधु निलेशचंद्र विजय पहले भी 3 नवंबर को आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे थे, जहां राज्य सरकार ने 15 दिन में समाधान का आश्वासन दिया था। लेकिन तय समय सीमा पूरी होने के बावजूद कोई कदम न उठाए जाने पर साधु ने नए आंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवकर और मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने समाधान का वचन दिया था, परंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
गौरतलब है कि बीएमसी ने स्वास्थ्य जोखिमों का हवाला देते हुए जुलाई में मुंबई के 51 कबूतरखाने बंद कर दिए थे, जिससे जैन और मराठी समुदायों के बीच तनाव बढ़ा था। विरोध के बीच बीएमसी ने चार अस्थायी फीडिंग ज़ोन प्रस्तावित किए—एरोलि-मुलुंड चेक नाका, वरली जलाशय, बोरिवली (गोराई) और अंधेरी पश्चिम। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते इनका भी विरोध जारी है। इस मुद्दे पर दायर याचिका की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को हाईकोर्ट में होगी।
इसी बीच साधु निलेशचंद्र ने ‘जन कल्याण’ नामक राजनीतिक संगठन बनाने की भी घोषणा की है और आगामी बीएमसी चुनाव में जैन उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है। वे कबूतरों को दाना डालने की अनुमति, पक्षी-खोराक ज़ोन की स्थापना और ग़लत स्वास्थ्य दावों वाले बोर्ड हटाने जैसी मांगों पर अड़े हुए हैं। साधु का कहना है कि यह लड़ाई केवल कबूतरों की नहीं, बल्कि सभी अवाजहीन प्राणियों के अधिकारों की है।




