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फ्रेट चार्ज विवाद पर सूरत के नीटर्स व सूरत के व्यापारिक संगठन आमने-सामने-

व्यापारी संगठनों की बैठक में ‘पुराना धारा-धोरण’ यथावत रखने का निर्णय

सूरत। सूरत के कपड़ा उद्योग में फ्रेट चार्ज और पेमेंट टर्म्स को लेकर सूरत के नीटर्स व व्यापारी संगठनों के बीच पिछले दो दिनो से जारी विवाद को लेकर मंगलवार को सूरत निटिंग ट्रेडर्स एसोसिएशन (SKTA) और सूरत मंडप क्लॉथ एसोसिएशन की बैठक रघुवीर बिजनेश एम्पायर में हुई जिसमें दोनों संगठनों ने एक ही मंच पर बैठकर पुराने व्यापारिक नियम और भाड़ा प्रणाली यथावत रखने का सामूहिक निर्णय लिया।सभी व्यापारी पुराने धारा-धोरण के अनुसार ही व्यापार जारी रखें। संगठन ने कहा था कि सूरत के निटर्स पहले से ही अधिक भाड़ा (1.75 प्रति किलो रुपये) लेते हैं जबकि वास्तविक खर्च लगभग 1 प्रति रुपये किलो है, इसलिए भाड़ा और ब्याज बढ़ाने की मांग अनुचित है।मंडप एसोसिएशन के अध्यक्ष देव संचेती ने कहा कि सूरत के नीटर्स द्वारा भाड़ा लेना ही गलत परम्परा है।सिलवासा या बाहर से आने वाले माल पर भाड़ा वाजिब है।लोकल अन्य माल का भाड़ा भाव मे जुड़ा हुआ ही आता है। सूरत के नीटर्स ने दो दिन पहले पत्र जारी कर डिलीवरी चार्ज बढ़ाने व नए धारा- धोरण का पत्र जारी किया था।

मंडप क्लॉथ एसोसिएशन व SKTA ने यह भी स्पष्ट किया था कि ब्याज की गणना पूर्ववत 60 दिन बाद ही लागू होगी और किसी भी बिल में अतिरिक्त भाड़ा जोड़ा गया तो वह अस्वीकार किया जाएगा।

डिलीवरी चार्ज बढ़ाने का विरोध करते हुए सूरत मंडप क्लॉथ एसोसिएशन ने इसे एकतरफा बताते हुए आज रघुवीर बिजनेस एंपायर में बैठक बुलाई थी। बैठक में दोनों संघों के पदाधिकारी और शहर के प्रमुख व्यापारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।बैठक में व्यापक चर्चा के बाद यह सर्वसम्मति बनी कि सूरत के कपड़ा व्यापार में किसी भी प्रकार का नया भाड़ा या अलग पेमेंट नियम लागू नहीं किया जाएगा। सभी व्यापारी पुराने नियमों (धारा-धोरण) के अनुसार ही माल खरीदेंगे और बेचेंगे।”बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि कोई व्यापारी इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उसे संगठन को 51,000 रुपये का दंड देना होगा। दंड राशि नहीं भरने पर संबंधित व्यापारी को संगठन से निष्कासित भी किया जा सकता है।दोनों संगठनों की एकता और साझा निर्णय ने यह संदेश दिया है कि सूरत के व्यापारी किसी भी मनमानी निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे और सामूहिक सहमति से ही आगे बढ़ेंगे

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