राजस्थानसामाजिक/ धार्मिक

श्री सिद्धचक्र यंत्र नवपद की उपासना का श्रेष्ठ माध्यम है-साध्वी डाॅ.विधुतप्रभा 

खरतरगच्छ संघ में सैकड़ों साधको ने नवपद ओलीजी की आराधना प्रारम्भ की

ओलीजी की आराधना आत्मिक एवं शारीरिक व्याधि को दूर करती है-साध्वी डाॅ. विधुतप्रभा 

बाड़़मेर। कोटड़िया-नाहटा ग्राउण्ड स्थित सुधर्मा प्रवचन वाटिका में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ चातुर्मास कमेटी के तत्वाधान एवं खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा. की पावन निश्रा व बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुतप्रभा श्री व श्रमण-श्रमणीवृन्द के पावन सानिध्य में चल रहे संघ शास्ता वर्षावास 2025 के दौरान सोमवार को बहिन म.सा. साध्वी डाॅ. विधुत्प्रभाश्री ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि नवपद की आराधना जन्म-जरा-मृत्यु के महाभयंकर रोग को मिटाकर अक्षय सुख प्रदान करती है तथा आराधना से ही बाह्य-अभ्यंतर सुख की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप की साधना ही नवपद ओली आराधना का सार है। यह आराधना आत्मिक एवं शारीरिक आरोग्य बढ़ाती है, कर्मो की निर्जरा तथा शारीरिक व्याधि को दूर करती है। उन्होंने कहा कि श्री सिद्धचक्र यंत्र नवपद की उपासना का श्रेष्ठ माध्यम है। इस यंत्र में पंचपरमेष्ठी, चैबीस यक्ष-यक्षिणी, सोलह विद्या-देवियां, अट्ठाइस लब्धियां, नवनिधि, अष्टसिद्धि, अष्टमंगल व नवग्रह का समावेश ज्ञानियों की ओर से किया गया है। इस यंत्र की पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। बहिन म.सा. ने कहा कि नवपद ओली का तप आयंबिल की ओर से किया जाता है। बिना तेल-घी मिर्च-मसालों का मात्र उबला हुआ आहार आयंबिल में लिया जाता है, जो कि शरीर के आरोग्य का विशेष तंत्र है। इतिहास प्रसिद्ध राजकुमार श्रीपाल एवं मयणासुंदरी ने श्री सिद्धचक्र एवं नवपद की आराधना से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति तथा यश कीर्ति प्रतिष्ठा को पाया था। नवपद की आराधना से रोग, कष्ट मिट जाते हैं। मैना सुंदरी की नवपद आराधना की शक्ति से पति सहित 700 कौडियों के रोग स्वस्थ हो गए थे। गुरु के वचनों के प्रति सच्ची श्रद्धा हो तो आत्मा का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि सम्यक श्रद्धा जगी नहीं है चिंतन का विषय है परमात्मा को धन्यवाद देना चाहिए। प्रभु हमें संबल दे कि जीवन में किसी प्रकार का घिनौना कार्य लोभ तृष्णा नहीं करें।

जीवन में अनेक आनंद है सम्यक चाबी गुरु के पास ही होती है। गुरु के वचनों पर श्रद्धा होनी चाहिए। भोग के प्रति हर व्यक्ति आसक्त रहता है। गुरु और जिनवाणी के प्रति सम्यक श्रद्धा बहुत कम होती है। इस अवसर पर सैकड़ों साधकों ने नवपद ओली की आराधना प्रारंभ की।

चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष अशोक धारीवाल व मीडिया प्रभारी कपिल मालू ने बताया कि चातुर्मास कमेटी के तत्वावधान में लाभार्थी श्रीमती हुआदेवी सुरतानमल मालू परिवार चोहटन हाल भाभर-अहमदाबाद द्वारा सोमवार से शाश्वत नवपदजी की ओलीजी तप की आराधना प्रारम्भ हुई जिसमें सैकड़ों की संख्या में आराधकों ने नवपदजी की ओली प्रारम्भ की यह आराधना जप तप अनुष्ठान के साथ 07 अक्टूबर को ओलीजी की पूर्णाहुति होगी व 08 अक्टूबर को ओलीजी का पारणा शालीभद्र भोजन वाटिका में होगा। इस अवधि में आराधक को प्रतिदिन प्रतिक्रमण, सामायिक, स्नात्र पूजा, प्रवचन, देववंदन, आयंबिल, स्वाध्याय, सायं प्रतिक्रमण रात्रि भक्ति, माला, जाप, प्रदक्षिणा, साथिया आदि क्रियाएं सम्पन्न करनी होती है। चातुर्मास कमेटी के कोषाध्यक्ष बाबुलाल छाजेड़ कवास व ट्रस्टी गौतमचन्द बोथरा ने बताया कि सोमवार को प्रवचन माला के शुभारम्भ में संगीतकार गौरव मालू व गुरूभक्तों द्वारा सामुहिक गुरूवन्दन कर साध्वी मण्डल द्वारा प्रार्थना भजन के साथ हुआ। सोमवार को आयंबिल की तपस्या कंचन सुरेन्द्र वडेरा की रही। खरतरगच्छाधिपति के सूरि मंत्र की पीठिका के निमित आराधना भवन में प्रतिदिन के रूप में सोमवार को प्रातः 06.00 बजे से सांय 06.00 बजे तक अखण्ड नवकार मंत्र का जाप व सांय 08.15 बजे से 09.00 बजे तक दादा गुरूदेव के इक्कतीसा पाठ आयोजन सम्पन्न हुआ।

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