विषय सुखों की आसक्ति से रहे दूर : आचार्य श्री महाश्रमण
आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी का द्वितीय चरण का मध्य दिवस

04.09.2025, गुरुवार, कोबा, गांधीनगर।शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में अहमदाबाद वासी नित्य नवीन आध्यात्मिक रश्मियों को प्राप्त कर रहे है। बुधवार को हुए दीक्षा समारोह में ऐतिहासिक पलों के सभी साक्षी बने वही प्रतिदिन के होने वाले मुख्य प्रवचन कार्यक्रम आदि से भी सभी लाभान्वित हो रहे है। तेरापंथ के आद्य प्रणेता आचार्य भिक्षु की जन्म त्रिशताब्दी के द्वितीय चरण के अंतर्गत आज मध्यवर्ती दिवस था। कल भादवा सुदी तेरस को आचार्य भिक्षु का चरमोत्सव दिवस भी है। गुरूदेव के सान्निध्य में आज का मुख्य प्रवचन समारोह “तब तक तेरापंथ चलेगा” विषय पर आधारित रहा। आज का दिवस कई दृष्टियों से तेरापंथ धर्मसंघ के लिए महत्वपूर्ण भी है। एक ओर जहां आज ही के दिन आचार्य श्री भिक्षु ने संथारा ग्रहण किया था वहीं तेरापंथ के सप्तम आचार्य श्री डालगणी का आज ही के दिन महाप्रयाण दिवस है। परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी से भी आज का दिवस जुड़ा हुआ है। दशमाचार्य श्री महाप्रज्ञ जी से आज ही के दिन गुरूदेव को युवाचार्य पद प्राप्त हुआ था। इस प्रकार आज का दिन अनेक दृष्टियों से महत्त्व को प्राप्त है।

मंगल प्रवचन में गुरुदेव ने आगम वाणी फरमाते हुए कहा – आदमी के पास पाँच इंद्रियाँ होती है व सबका अपना अपना विषय होता है, कार्य होता है। जो इंद्रिय सुखों में आसक्त हो जाता है वह धर्म के मार्ग से च्युत हो जाता है। व्यक्ति को विषय सुखों में एवं हिंसा जनित कार्यों में आसक्त नहीं होना चाहिए। आज का भादवा सुदी बारस का दिन है और यह हमारे धर्म संघ की तीन मुख्य घटनाओं से जुड़ा हुआ है। पहला प्रसंग है कि आज के दिन आचार्य भिक्षु ने संथारा ग्रहण किया। इस धर्मसंघ की स्थापना के 265 वर्ष पूरे हो चुके है। दो प्रकार के मार्ग होते है राजमार्ग व संकड़ी पगडंडी। राजमार्ग पर चलना सरल होता है, संकड़ी पगदंडी पर चलना कठिन होता है। आचार्य भिक्षु ने अभिनिष्क्रमण किया, क्रांति की मानों उन्होंने संकरे मार्ग को चुना। किसी ने उनसे पूछ लिया कि आपका यह सँकडा मार्ग कब तक चलेगा ? आचार्य भिक्षु का उत्तर रहा कि जब तक इस धर्मसंघ में आचार निष्ठा, मर्यादा-निष्ठा व सिद्धांतों के प्रति निष्ठा बनी रहेगी तथा वस्त्र पात्र, उपकरणों के प्रति आसक्ति नहीं होगी तब तक साधना का यह मार्ग चलता रहेगा।

गुरूदेव ने आगे कहा कि साधु आसक्ति से दूर रह कर अपनी मर्यादाओं के प्रति जागरूक रहें यह आवश्यक है दूसरा आज का प्रसंग है आज के दिन आचार्य श्री डालगणि का महाप्रयाण होना। उनका गुजरात, कच्छ क्षेत्र में मुनि अवस्था में विचरण हुआ व चातुर्मास भी हुए। वे विलक्षण आचार्य थे क्योंकि उनका चयन धर्मसंघ द्वारा किया गया था। लगभग 12 वर्ष उनका कार्यकाल रहा। आज के दिन आचार्य महाप्रज्ञ जी ने मुझे युवाचार्य का पदभार प्रदान किया। आचार्य महाप्रज्ञ जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। आचार्य तुलसी के वाचनाप्रमुखत्व में आगम संपादन, प्रेक्षाध्यान जैसे कितने आयामों में आपने कार्य किया था।

इसके पश्चात प्रवास व्यवस्था समिति की ओर से श्री रायचंद लूनिया, श्री नरेंद्र पोरवाल ने अपने विचारों की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में आगामी सन् 2026 मर्यादा महोत्सव स्थल छोटी खाटू से भी आज बड़ी संख्या में श्रावक समाज गुरू चरणों में उपस्थित था। महोत्सव के लोगो का भी आचार्य प्रवर की सन्निधि में अनावरण किया गया। जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा एवं खाटू मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री मनसुख सेठिया ने भावाभिव्यक्ति दी, छोटी खाटू वासियों ने सामूहिक गीत का संगान किया।




