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श्रमण संघ के प्रथम पट्टधर थे आचार्य श्री आत्माराम जी आचार्य सम्राट-डॉ. शिवमुनि जी म.सा.

4 सितम्बर 2025, अवध संगरीला, बलेश्वर, सूरत
भाद्रपद शुक्ला द्वादशी को श्रमण संघ के प्रथम पट्टधर आचार्य श्री आत्माराम जी म.सा. का जन्म हुआ था। उनका जन्म पंजाब राज्य के एक छोटे से कस्बे राहों गांव में हुआ था। बाल्यकाल में उनके माता-पिता, दादी का साया उठ गया था। एक श्रावक उनको श्रमण संघ के आचार्य श्री मोतीरामजी म.सा. के पास लेकर आये। आचार्य मोतीरामजी म.सा. ने जब उनको देखा, उनकी हाथ की रेखा को देखा तो उन्हें लगा कि यह बालक कोई सामान्य नहीं है, यह धर्म का नाम उज्ज्वल करेगा।’’ उपरोक्त दृष्टांत आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने आचार्य श्री आत्मारामजी म.सा. के अवतरण दिवस पर उपस्थित धर्म सभा के मध्य फरमाया।
आचार्य श्री जी ने आचार्य श्री आत्मारामजी म.सा. के जीवन के अनेक पहलूओं को सामने रखते हुए बतलाया कि उन्होंने 12 वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण की। बनूड़ गांव में एक वृक्ष के नीचे आचार्यश्री जी को दीक्षा पाठ पढाया गया। वे संस्कृत, प्राकृत के प्रकाण्ड पण्डित थे। उन्होंने तत्वार्थ सूत्र जैनागम समन्वय नामक एक ग्रंथ तैयार किया, जिसमें यह प्रमाणित किया कि यह तत्वार्थ सूत्र 32 आगमों का सार है।
आचार्य श्री आत्माराम जी म.सा. ने जीवन में अनेक परिषहों को सहन किया, उनके कुल्हे की हड्डी टूट गई थी, उनके आंखों की रोशनी भी चली गई ऐसे समय में भी वे पूर्ण समभावों में रहे। उनका व्यक्तित्व सरल, विनम्र और मृदुभाषी था।
उन्होंने आगे फरमाया कि आचार्य आत्मारामजी म.सा. श्रमण संघ के प्रथम पट्टधर हुए। वे श्रमण संघ के साधु सम्मेलन में गए नहीं किंतु उनका नाम मालव केसरी श्री सौभाग्यमल जी म.सा. द्वारा सदन में रखा गया तो सभी संतों ने स्वीकृति दे दी ऐसा उनका व्यक्तित्व था। वे उपाध्याय, पंजाब के आचार्य और बाद में श्रमण संघ के महान आचार्य बने। संस्कृत, प्राकृत भाषा में श्री उपासकदशांग, श्री आचारांग सूत्र आदि उन्नीस शास्त्र हाथ से लिखे, उनके शास्त्रों की देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी मांग थी।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने उद्बोधन में फरमाया कि जब कोई व्यक्ति ध्यान में बैठता है तो ध्यान नहीं लगता है सद्गुरु ध्यान का आलंबन देते हैं। शरीर साधन है, पर वह पराया हैं, जीव उसमें रहने के लिए आया, यह ज्ञान भेद ज्ञान के द्वारा ही किया जा सकता है और वह भेद ज्ञान सद्गुरु ही देते हैं।
आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में अनेक जगहों से संघ क्षमापना एवं गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हो रहे हैं, आज अक्षर टाउन से आदर्श महिला मण्डल संघ, पाण्डेसरा महिला मण्डल संघ गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हुआ। सिरसा, बैंगलोर, उधना से श्रद्धालु उपस्थित थे।
आज उधना से श्रीमती संतोषदेवी ललितकुमार जी बाबेल एवं श्रीमती चंदादेवी सुरेशकुमार जी चण्डालिया ने सिद्धि तप के अंतर्गत आज पांच दिन के उपवास का प्रत्याख्यान लिया, तपस्वियों का शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन द्वारा माला, शॉल एवं मोमेन्टो द्वारा सम्मान किया।

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