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प्रभु की वाणी बार-बार सुनें: आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा.

सूरत,अवध संगरीला, बलेश्वर।आचार्य सम्राट डॉ.श्री शिवमुनिजी म.सा. ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि पर्युषण महापर्व पर श्रावकों ने ध्यान, साधना, दान, तप, शील और भाव की आराधना कर अंतःकरण से कर्मों की निर्जरा की है, यह अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने फरमाया कि जिस प्रकार पहाड़ को धीरे-धीरे खोदने से वह टूट जाता है और जलधारा के निरंतर प्रवाह से पत्थर पर भी निशान हो जाते हैं, उसी प्रकार प्रभु की वाणी बार-बार सुनने से साधना में परिपक्वता आती है। उन्होंने श्रावकों से आग्रह किया कि वे जैनाचार्यजी यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध शुक्ल ध्यान के प्रयोगों को सुनकर साधना को और प्रगाढ़ करें।

उन्होंने आगे कहा कि नारी कोमल और पुरुष कठोर माने जाते हैं, किंतु जल की कोमल धारा भी कठोर चट्टान को काट सकती है। अतः कोमल बनें, कठोर नहीं। मृदु व कोमल अंतःकरण से आलोचना करें और जीवनभर जिस-जिस व्यक्ति को ठेस पहुंचाई हो, उनसे अंतःहृदय से क्षमा याचना करें, यही कर्म निर्जरा का मार्ग है।

आचार्यश्री ने स्पष्ट किया कि तपस्या का प्रचार-प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। तप का उद्देश्य केवल आत्मकल्याण होना चाहिए, अहंकार या यश की चाह नहीं। उन्होंने भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सोने की चिड़िया था, जहां की शिक्षा प्रणाली इतनी श्रेष्ठ थी कि विदेशों से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। अंग्रेजों और आक्रांताओं ने भारत को लूटा और आज कृषि व गोपालन प्रधान देश मांस निर्यात में आगे है, जो विचारणीय है।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने कहा कि जिस प्रकार अग्नि की पूजा कर ब्राह्मण पूजनीय होता है, वैसे ही जो शिष्य गुरु इंगित और वचनों की आराधना करता है, वह शिष्य पूज्य बन जाता है।

इस अवसर पर युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘भंवर में आन अटका हूं, मुझे भी शिव सहारा दो’’ भजन प्रस्तुत किया। साधना जी ओस्तवाल ने ‘हम पुण्यशाली हैं हम भाग्यशाली हैं’ भजन से कार्यक्रम को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम में लादूलाल पिछोलिया (सूरत) ने मौन सहित चौविहार 8 उपवास, गुंडलपेट (मैसूर) से संगीताजी गन्ना ने 4 उपवास और नाशिक से श्रीमती रेणु जैन ने 7 उपवास का प्रत्याख्यान लिया। श्री लादूलाल पिछोलिया का शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से मोमेंटो, शॉल व माला द्वारा सम्मान किया गया।आज के अवसर पर हिंगनघाट, नागपुर, बड़नेरा, दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचे।

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