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ध्यान से स्थिर होता है चंचल मन : आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा.

सूरत। आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि कई बार व्यक्ति को अनुभव होता है कि उसका मन स्थिर नहीं है, मन कहीं टिक नहीं रहा है। इसका मुख्य कारण मन में विचारों का भर जाना है। मन को स्थिर करने का सर्वोत्तम उपाय ध्यान है, जिससे चंचल मन शांत होकर आत्मा की ओर प्रवृत्त होता है। उन्होंने कहा कि जीव की उपस्थिति से ही शरीर क्रियाशील रहता है, और जब जीव शरीर से निकल जाता है तो शरीर निष्क्रिय हो जाता है। आत्मा का अनुभव किया जा सकता है, किन्तु उसे देखा नहीं जा सकता।

चन्दनबाला बालिका मण्डल संयुक्त मेवाड़ संघ की कन्याओं को प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री जी ने कहा कि आत्मकल्याण के लिए प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे का ध्यान आवश्यक है। चलते हुए और भोजन करते हुए भी यह भाव रखना चाहिए कि शरीर क्रिया कर रहा है, परंतु मैं अपनी आत्मा में स्थित हूं। इस भेदज्ञान से कर्मों का बंधन नहीं होता।

प्रमुखमंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए लक्ष्य निश्चित करना चाहिए और जीव-अजीव का भेद स्पष्ट रूप से समझना चाहिए। वहीं युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने भक्ति गीत ‘‘न चिट्ठी आई, न आया बुलावा…’’ प्रस्तुत कर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

सभा में चन्दनबाला बालिका मण्डल की अध्यक्षा सुश्री संस्कृति संकलेचा एवं उपाध्यक्ष सुश्री चिनल चौरड़िया ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। जयपुर, सवाई माधोपुर, गंगापुरसिटी सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। कामरेज से श्रीमती उर्मिला देरासरिया ने 25 उपवास प्रत्याख्यान लिया, जिनका सम्मान शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउंडेशन की ओर से किया गया।

विशेष रूप से, श्री ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस की आत्म ध्यान प्रसार योजना अंतर्गत दिनांक 16 सितम्बर 2025 को सुबह 8 से 11 बजे तक तीन घंटे का ऑनलाइन आत्म ध्यान साधना शिविर जैनाचार्यजी यूट्यूब चैनल पर आयोजित होगा। साथ ही, आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. के 84वें प्रकाशोत्सव (18 सितम्बर 2025) पर राष्ट्रीय महिला शाखा नई दिल्ली द्वारा 84 हजार एकासन का संकल्प किया गया है, जिसके अंतर्गत देशभर के श्रावक-श्राविकाएं जन्मोत्सव पर एकासन तप कर अपनी भेंट अर्पित करेंगे।

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