
सूरत: सूरत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिकों को वापस लाने के लिए शहर के उद्योगकारों ने बड़ी पहल शुरू की है। युद्ध और गैस की कमी के कारण अपने वतन लौट गए करीब 2.50 लाख श्रमिकों को वापस बुलाने के लिए फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FOGWA) और साउथ गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) ने संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण घोषणा की है। उद्योगकारों ने स्पष्ट किया है कि जिन श्रमिकों के पास वापस आने के साधन नहीं हैं, उन्हें लाने के लिए उद्योग स्वयं वाहनों की व्यवस्था करेगा।
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए थे, जिसका सीधा असर सूरत के प्रोसेसिंग और वीविंग उद्योग पर पड़ा था। हालांकि अब दोनों देशों के बीच 15 दिन के युद्धविराम की घोषणा के बाद क्रूड ऑयल के दाम में प्रति बैरल 15 से 20 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते जिन टेक्सटाइल यूनिट्स में उत्पादन कम किया गया था, वहां अब दोबारा पूरी क्षमता के साथ काम शुरू करने की तैयारी चल रही है।
श्रमिकों के पलायन के पीछे मुख्य कारण कमर्शियल गैस की कमी और बढ़ी हुई कीमतें थीं। इस समस्या को लेकर उद्योगकारों ने राज्य सरकार और डिप्टी सीएम से संपर्क किया था। सरकार ने उद्योगों को पर्याप्त गैस उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। वर्तमान में 2,200 से 2,500 सिलेंडर की तत्काल जरूरत वाली फैक्ट्रियों का सूचीकरण भी कर लिया गया है और कलेक्टर कार्यालय द्वारा वितरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
FOGWA के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने कहा कि कई श्रमिक आर्थिक तंगी या परिवहन की सुविधा के अभाव में अपने गांवों में ही रुके हुए हैं। ऐसे श्रमिकों को वापस लाने के लिए उद्योगकार निजी बसों और अन्य परिवहन साधनों की व्यवस्था करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि कोविड काल में भी इसी तरह श्रमिकों को सुरक्षित वापस लाया गया था और जरूरत पड़ने पर इस बार भी वही व्यवस्था की जाएगी।
उद्योगकारों के अनुसार, श्रमिकों के पलायन से टेक्सटाइल उद्योग पर बड़ा असर पड़ा है। करीब 2.50 लाख श्रमिकों के वतन लौटने से कई फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। अब यार्न के दाम स्थिर होने और उत्पादन में सुधार के साथ श्रमिकों की कमी महसूस की जा रही है। फैक्टरी मालिक अपने भरोसेमंद कारीगरों को फोन कर स्थिति सामान्य होने की जानकारी दे रहे हैं और जल्द लौटने की अपील कर रहे हैं।
प्रशासन और उद्योगकारों के बीच बेहतर समन्वय भी देखने को मिल रहा है। जिला कलेक्टर, डीएसओ और डिप्टी कलेक्टर के साथ उद्योग संगठनों का लगातार संपर्क बना हुआ है। गैस की जरूरत वाले उद्योगों का डेटा प्रशासन को सौंप दिया गया है, जिसके बाद फैक्ट्रियों तक सीधे गैस सिलेंडर पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
उद्योगकारों का मानना है कि सरकार के सकारात्मक रवैये और श्रमिकों की वापसी से आगामी सप्ताह में सूरत के पूर्व क्षेत्र के टेक्सटाइल कारखानों में फिर से रौनक लौटने की संभावना है।



