
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। काला बाजारी और गैस की जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार अब उपभोक्ताओं को दो गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच 25 दिनों का इंतजार करना होगा।
सरकार ने 7 मार्च को यह फैसला लागू किया है ताकि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से गैस सिलेंडर का स्टॉक न कर सके। हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
पहले रसोई गैस सिलेंडर 15 दिनों के अंतराल पर बुक कराया जा सकता था। हाल ही में इसे बढ़ाकर 21 दिन किया गया था, लेकिन अब इसे सीधे 25 दिन कर दिया गया है। यानी यदि किसी उपभोक्ता ने आज गैस सिलेंडर बुक कराया है तो वह अगला सिलेंडर 25वें दिन ही बुक करा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए जरूरी है, हालांकि इससे बड़े परिवारों को कुछ परेशानी हो सकती है।
इस बीच गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडर में 114.50 रुपये की वृद्धि की गई है।
सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत दिल्ली में अब 913 रुपये हो गई है, जो पहले 853 रुपये थी। नए दाम 7 मार्च से पूरे देश में लागू कर दिए गए हैं।
अन्य महानगरों की बात करें तो मुंबई में यह सिलेंडर 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये में मिल रहा है। इस बढ़ोतरी से आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ना तय है।
हालांकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत दी गई है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत गरीब परिवारों को 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी। यह लाभ साल में 12 सिलेंडर तक मिलेगा।
वहीं होटल, रेस्टोरेंट और लारी-गल्ला चलाने वालों के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर महंगा हो गया है। 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में इसकी कीमत अब 1883 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी 28 रुपये का इजाफा किया गया था।
इस तरह नए साल की शुरुआत से ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में कुल 302.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे छोटे व्यापारियों और होटल व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।




