
सूरत। सूरत की तीसरी अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस.एस. परिख की विशेष नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट अदालत ने चेक बाउंस के दो अलग-अलग मामलों में आरोपी व्यापारी अंकित मनीष लीलहा को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष की सादी कैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता को कुल 18.60 लाख रुपये मुआवजा चुकाने का आदेश दिया है।
मामलों में शिकायतकर्ता श्रवणसिंह गणेशाजी बारोट, जो रिंग रोड स्थित न्यू टीटी-2 मार्केट में सरोवर प्रिंट्स के नाम से साड़ी (कपड़ा) का थोक व्यापार करते हैं, ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता एच.ओ. शर्मा ने पैरवी की, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता डी.एम. गांधी उपस्थित रहे।
अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, आरोपी अंकित मनीष लीलहा (उम्र 26 वर्ष), जो अंकिता क्रिएशन का अधिकृत व्यक्ति और व्यवस्थापक है तथा उसका पता 405, समय कॉम्प्लेक्स, लैंडमार्क, आनंद महल रोड, नवयुग कॉलेज, अडाजन तथा प्लॉट नंबर-71, दूसरी मंजिल, गणेश स्ट्रीट, भाठेना, उधना, सूरत है, उसने शिकायतकर्ता से व्यापारिक संबंध स्थापित कर साड़ी का माल उधार में खरीदा था।
पहले मामले में आरोपी ने अप्रैल 2022 के दौरान शिकायतकर्ता से 10,15,056 रुपये का माल उधार में लिया और भुगतान के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आनंद महल रोड शाखा के खाते से 3,56,160 रुपये के तीन चेक दिए, जिनकी कुल राशि 10,68,480 रुपये थी। बैंक में प्रस्तुत करने पर ये चेक अनादरित हो गए। सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10,60,000 रुपये मुआवजा चेक की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित एक माह में चुकाने का आदेश दिया।
दूसरे मामले में आरोपी ने कियारा फैशन के नाम से व्यापार करते हुए शिकायतकर्ता से 8,01,360 रुपये का साड़ी का माल उधार में खरीदा और भुगतान के लिए चार चेक दिए, जो बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गए। अदालत ने इस मामले में आरोपी को 2 वर्ष की सादी कैद तथा शिकायतकर्ता को 8 लाख रुपये मुआवजा ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया।
अदालत ने आरोपी के पूर्व जमानत बांड रद्द करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी करने तथा संबंधित पुलिस निरीक्षक को वारंट की त्वरित अमलवारी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा मुआवजा राशि की वसूली के लिए अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 421 के तहत सूरत कलेक्टर को आदेश दिया है कि राशि को बकाया राजस्व की तरह वसूल कर अदालत में जमा कराई जाए, ताकि शिकायतकर्ता को भुगतान किया जा सके।



