
सूरत। रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी युद्ध की वैश्विक परिस्थितियों का असर अब सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। डाइंग और प्रोसेसिंग मिलों में इस्तेमाल होने वाले कोयले के दामों में अचानक भारी उछाल से उद्योगकारों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार पिछले चार दिनों में कोयले की कीमत में प्रति टन 800 से 1200 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसे हाल के वर्षों का सबसे तेज उछाल माना जा रहा है। उद्योग विशेषज्ञों और साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एसोसिएशन (SGTPA) के अनुसार यदि यही स्थिति जारी रही तो प्रोसेसिंग चार्ज में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
टेक्सटाइल उद्योग में ‘ग्रे’ कपड़े को रंगीन और तैयार फैब्रिक में बदलने वाली डाइंग-प्रोसेसिंग मिलों के लिए कोयला प्रमुख ईंधन है। कोयले के दाम बढ़ने से ऑर्डर बुकिंग और कीमत तय करने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सूरत और आसपास के क्षेत्रों में करीब 400 से अधिक डाइंग व प्रोसेसिंग मिलें संचालित हो रही हैं, जो फिलहाल संकट की स्थिति से गुजर रही हैं। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक अधिकतर मिलों के पास केवल 7 दिन का कोयला स्टॉक ही बचा है। यदि अगले एक सप्ताह में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई या कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो कई मिलों को उत्पादन बंद करना पड़ सकता है।
सूरत में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश कोयला इंडोनेशिया से आयात किया जाता है। समुद्री मार्ग से आने वाले इस कोयले पर अब शिपिंग चार्ज में प्रति टन 8 अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल कीमत में ज्यादा बदलाव नहीं होने के बावजूद शिपिंग और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से आयातकों के स्तर पर ही कीमतें बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर सूरत के प्रोसेसिंग उद्योग पर पड़ा है।
औसतन सूरत की एक मिल में प्रतिदिन 40 से 50 टन कोयले की खपत होती है। इस हिसाब से शहर में रोज हजारों टन कोयले की जरूरत पड़ती है। ऐसे में प्रति टन 1000 रुपये की बढ़ोतरी से उद्योग की लागत में करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर अंततः तैयार कपड़ों की कीमतों पर पड़ेगा और बाजार में कपड़े महंगे हो सकते हैं।
SGTPA के अध्यक्ष जीतुभाई वखारिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देकर स्थानीय आयातकों ने कीमतें बढ़ा दी हैं। एसोसिएशन स्थिति पर नजर रखे हुए है और जल्द ही सदस्यों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। वहीं उद्योगकारों ने यह आशंका भी जताई है कि अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।



