
सूरत। पुणागाम क्षेत्र में संपत्ति बिक्री के नाम पर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शाश्वत प्लाज़ा में स्थित तीन दुकानों को 32 लाख रुपये में खरीदने के बाद जब फाइनेंस कंपनी ने उन्हें सील कर दिया, तब लोन की सच्चाई छुपाकर बिक्री दस्तावेज कराने वाले पूर्व मालिक की धोखाधड़ी उजागर हुई। इस मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज किया है।
परवत पाटिया, दयालजी रो-हाउस निवासी जीतेंद्र (जितेश) मोहनलाल पुरोहित पहले पुणागाम विजय पैलेस में रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाते थे। वर्ष 2022 में उनकी पहचान बिलबुक प्रिंटिंग के काम से जुड़े केतन धीरू मंडाविया (निवासी: साईं पैलेस, अमरोली) से हुई। केतन ने शाश्वत प्लाज़ा में अपनी तीन दुकानें होने और उन्हें बेचने की इच्छा जताई। तीनों दुकानें दिखाने के बाद जीतेंद्र ने नकद सहित कुल 32 लाख रुपये अदा कर तीनों दुकानें खरीद लीं।
बिक्री के समय केतन मंडाविया ने यह भरोसा दिलाया कि दुकानों पर किसी प्रकार का कोई बकाया या बोझ नहीं है और उसी आधार पर दस्तावेज भी कराए गए। बाद में केतन ने ये दुकानें किराए पर भी दे दीं।
हालांकि वर्ष 2023 में बजाज फाइनेंस कंपनी ने दुकानों पर नोटिस चस्पा किया, जिसमें बताया गया कि ये दुकानें लोन पर हैं और किस्तें नहीं चुकाई गई हैं। वर्ष 2024 में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब फाइनेंस कंपनी ने तीनों दुकानों को सील कर उनका कब्जा ले लिया। इससे जीतेंद्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
जांच में सामने आया कि इन दुकानों की पहली मालिक सरोजदेवी मुंदड़ा थीं और यह संपत्ति पहले से ही बैंक में मॉर्गेज थी। केतन मंडाविया ने यह जानते हुए भी कि दुकानों पर लोन चल रहा है, संपत्ति खरीदी और बाद में लोन की जानकारी छुपाकर जीतेंद्र को बेच दी।
मामला सामने आने के बाद पुणा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने केतन मंडाविया के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की आगे की जांच सब-इंस्पेक्टर टी.आर. पाटिल द्वारा की जा रही है।




