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युद्ध संकट के बीच MSME को राहत की उम्मीद, क्या फिर टलेगी लोन EMI

RBI के फैसले पर सबकी नजर

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के प्रभाव अब भारतीय उद्योग जगत पर भी दिखाई देने लगे हैं। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से ‘ऑप्ट-इन रिपेमेंट मोरेटोरियम’ यानी बैंक लोन की किस्तों के भुगतान में अस्थायी राहत देने का प्रस्ताव रखा है।
जानकारी के अनुसार वैश्विक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे MSME क्षेत्र द्वारा उत्पादित वस्तुओं की मांग घटने की आशंका बढ़ गई है। निर्यात में देरी और व्यापारिक आय कम होने से छोटे उद्योगों की ऋण चुकाने की क्षमता कमजोर पड़ रही है और कई इकाइयों के बंद होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लागू किए गए लोन मोरेटोरियम से अपेक्षा से कम एनपीए (बेड लोन) बढ़े थे। इसी अनुभव को देखते हुए वर्तमान वैश्विक संकट के समय भी समान राहत की आवश्यकता महसूस की जा रही है। RBI ने इस प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने का संकेत दिया है।
उल्लेखनीय है कि RBI पहले ही निर्यातकों को राहत देने के लिए 30 जून तक एक्सपोर्ट लोन पर विशेष छूट की घोषणा कर चुका है। SIDBI की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार MSME सेक्टर पर कुल ₹67.6 लाख करोड़ का बकाया ऋण है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। हालांकि लोन की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है और बकाया किस्तों की दर घटकर 1.87 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले पांच वर्षों का न्यूनतम स्तर है।
कोरोना महामारी के दौरान RBI ने प्रारंभिक तीन माह के लिए और बाद में 31 अगस्त 2020 तक लोन मोरेटोरियम की सुविधा दी थी। यदि वर्तमान परिस्थितियों में फिर ऐसा निर्णय लिया जाता है तो देशभर के करोड़ों छोटे व्यापारियों और उद्योगों को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है।

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