
सूरत, 10 अप्रैल। सूरत के टेक्सटाइल उद्योग की वैल्यू चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली डाइंग-प्रिंटिंग और प्रोसेसिंग मिलें इस समय गंभीर संकट से गुजर रही हैं। कोयले के दामों में आंशिक कमी आने के बावजूद श्रमिकों की भारी कमी के कारण उत्पादन घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गया है। उद्योग से जुड़े मिल मालिकों का कहना है कि इससे खराब स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।
मिडिल ईस्ट में तनाव शुरू होने से पहले ही कोयले की बढ़ती कीमतों ने उद्योग को मुश्किल में डाल दिया था। हालांकि अब कोयले के भाव में प्रति टन 400 से 700 रुपये तक की कमी दर्ज की गई है और सप्लाई भी सामान्य होने लगी है। इसके बावजूद सूरत और आसपास के क्षेत्रों में स्थित लगभग 400 डाइंग-प्रिंटिंग और प्रोसेसिंग यूनिटों में श्रमिकों की कमी के कारण उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ रही है।
सचिन के टेक्सटाइल प्रोसेसर मितुल मेहता ने बताया कि वे कई वर्षों से इस उद्योग में हैं, लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा कि अधिकांश मिलों में श्रमिकों की भारी कमी है और बड़ी संख्या में मजदूर अपने वतन लौट चुके हैं, जिससे ऑर्डर होने के बावजूद समय पर उत्पादन संभव नहीं हो पा रहा है।
डाइंग मिल के मास्टर निकेत पटेल ने बताया कि श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए भोजन सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद श्रमिकों को रोकना मुश्किल हो गया। एक-दो परिवारों के जाने के बाद श्रमिकों के वतन लौटने का सिलसिला तेजी से बढ़ गया।
कोयला वितरकों के अनुसार मिलों में उत्पादन घटने से कोयले की खपत भी कम हो गई है। इंडोनेशिया से कोयले की सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और अप्रैल-मई तक पर्याप्त उपलब्धता रहने की संभावना है, लेकिन मानसून के दौरान फिर सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र वखारिया ने बताया कि फरवरी से आयातित कोयले के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार से बातचीत कर कई मिलों में लिग्नाइट का उपयोग शुरू किया गया, जिससे कोयले के भाव में कमी आई। उन्होंने कहा कि उद्योग को लगातार उचित दर पर कोयला उपलब्ध कराने के लिए सरकार से उच्चस्तरीय वार्ता जारी



