सूरत टेक्सटाइल उद्योग संकट में: 15% कारीगर वतन लौटे, एक शिफ्ट या सप्ताह में दो दिन बंद रखने पर मंथन

सूरत टेक्सटाइल उद्योग संकट में: 15% कारीगर वतन लौटे, एक शिफ्ट या सप्ताह में दो दिन बंद रखने पर मंथन
युद्ध का असर, यार्न महंगा, निर्यात ठप और गैस संकट से उद्योग पर तिहरा दबाव; 3 लाख कारीगरों के पलायन से बढ़ी चिंता
सूरत। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों विशेषकर दुबई में कपड़े का निर्यात लगभग ठप हो गया है, वहीं यार्न की कीमतों में अचानक तेज उछाल आने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। दूसरी ओर बाजार में महंगे कपड़े की मांग नहीं होने से उद्योग तिहरे संकट में फंस गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अब तक करीब 15 प्रतिशत यानी लगभग 3 लाख कारीगर सूरत छोड़कर अपने वतन लौट चुके हैं, जिससे उद्योग में चिंता बढ़ गई है।
उद्योग को बचाने के लिए फेडरेशन ऑफ वीवर्स एसोसिएशन ने सभी वीवर्स से गूगल फॉर्म के माध्यम से सुझाव मांगे हैं। इसमें कारखानों को एक शिफ्ट में चलाने, सप्ताह में दो दिन छुट्टी रखने, उत्पादन में 25 से 75 प्रतिशत तक कटौती करने या एक महीने तक पूर्ण बंद रखने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। अब तक करीब 2000 वीवर्स अपनी राय दे चुके हैं और आने वाले दिनों में बहुमत के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण क्रूड ऑयल महंगा होने से यार्न के दाम बढ़ गए हैं, हालांकि एसोसिएशन का कहना है कि कीमतों में कुछ बढ़ोतरी कृत्रिम भी हो सकती है। मंहगा यार्न लेकर सस्ता कपड़ा बनाना अब संभव नहीं रहा, जिससे वीवर्स की हालत और खराब हो गई है। इसके साथ ही गैस की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रसोई गैस नहीं मिलने और महंगे दाम पर उपलब्ध होने से मजदूरों को भोजन बनाना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते और 15 प्रतिशत कारीगरों के पलायन की आशंका जताई जा रही है।
वीवर्स एसोसिएशन ने कारखाना मालिकों से कारीगरों को रोकने के लिए भोजन या गैस की व्यवस्था करने की अपील की है। पिछले 20 दिनों से कई कारखाना मालिक अपने खर्च पर कारीगरों को संभाल रहे हैं और उन्हें आर्थिक सहायता भी दे रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के कारण यह स्थिति लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो सूरत का टेक्सटाइल उद्योग और गहरे संकट में जा सकता है, जिसे देखते हुए जल्द ही सामूहिक निर्णय लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी



