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गैरकानूनी निर्माण और मनपा की लापरवाही का शिकार बने निर्दोष कारीगर

कापोद्रा में एम्ब्रॉयडरी यूनिट में तीन सिलेंडर ब्लास्ट के साथ भीषण आग, दो कारीगरों की मौत, 11 घायल

सूरत। वराछा क्षेत्र के भरतनगर इलाके में स्थित एक एम्ब्रॉयडरी यूनिट में गुरुवार तड़के भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग के दौरान एक के बाद एक तीन गैस सिलेंडर फटने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई, जिसमें दो कारीगरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 11 अन्य कारीगर घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और मनपा की लापरवाही तथा अवैध निर्माण को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, वराछा के मारुति चौक के पास भरतनगर गली नंबर में स्थित प्लॉट नंबर 46-47 पर ग्राउंड फ्लोर सहित तीन मंजिला इमारत में विभिन्न एम्ब्रॉयडरी यूनिट संचालित हो रहे थे। गुरुवार सुबह करीब 5:30 बजे ग्राउंड फ्लोर पर अचानक आग लग गई, जो कुछ ही समय में पूरे भवन में फैल गई। इसी दौरान तीन गैस सिलेंडरों में विस्फोट होने से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।
घटना की सूचना मिलते ही शहर के पुना, कापोद्रा, सरथाणा, अश्विनीकुमार, डुंभाल, कतारगाम और मानदरवाजा सहित कई फायर स्टेशनों से दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं। फायर ब्रिगेड के जवानों ने कड़ी मशक्कत करते हुए करीब चार से साढ़े चार घंटे में आग पर काबू पाया।
आग लगने के समय इमारत की तीसरी मंजिल की छत पर अवैध रूप से बनाए गए टीनशेड के कमरों में 13 कारीगर फंसे हुए थे। दमकल कर्मियों ने जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। हालांकि, आग और धुएं के कारण हरिराम (25) और इब्राहिम शेख (36) की मौत हो गई, जबकि अन्य 11 कारीगरों को उपचार के लिए स्मीमेर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, टीम के मौके पर पहुंचने के समय इमारत में बिजली आपूर्ति चालू थी और आग तेजी से फैल चुकी थी। सिलेंडर ब्लास्ट के कारण आग तीसरी मंजिल तक पहुंच गई। हादसे में सिलाई मशीनें, कच्चा माल और अन्य सामान जलकर खाक हो गया। पूरे क्षेत्र में धुएं के गुबार छा जाने से लोगों में भय का माहौल बन गया।
फायर अधिकारियों ने बताया कि छत पर अवैध रूप से टीनशेड के छोटे और संकरे कमरे बनाए गए थे, जहां कारीगर रहते और खाना बनाते थे। आग लगने पर ये कारीगर इन्हीं कमरों में फंस गए थे। दमकल टीम ने कुछ कमरों को तोड़कर अंदर प्रवेश किया और बेहोशी की हालत में कारीगरों को बाहर निकाला। बाद में सीढ़ियों की मदद से सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

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