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1.30 करोड़ की ठगी के मामले में पुलिस की अधूरी जांच के कारण हाईकोर्ट ने आरोपी को दी जमानत

सूरत। 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के एक मामले में सूरत पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईको सेल) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। पुलिस ने शुरुआत में इस मामले को दीवानी (सिविल) प्रकृति का बताते हुए शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उसी आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर पुलिस खुद बैकफुट पर आ गई। इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने पाल क्षेत्र के एक आरोपी को जमानत दे दी है।
पाल पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, अडाजन के दर्जी मोहल्ला में रहने वाली रंजनबेन पटेल ने पाल स्थित केली रेसिडेंसी के निवासी पिंकेश सुरेशभाई पटेल, पाल के मोटी फलिया में रहने वाले प्रियंक पटेल और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
आरोप है कि इन लोगों ने ‘गैलेक्सी इन्फ्राकॉन’ के नाम से ‘गैलेक्सी एवेंचुरा’ प्रोजेक्ट शुरू कर रंजनबेन को निवेश का लालच दिया था। लालच में आकर रंजनबेन ने इस प्रोजेक्ट में 1.30 करोड़ रुपये का निवेश किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निवेश करवाने के बाद आरोपियों ने वह संपत्तियां किसी अन्य को बेचकर उनके साथ धोखाधड़ी की।
पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर पिंकेश पटेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पिंकेश पटेल ने स्थानीय वकील नरेंद्र रंगाणी और राकेश वाणिया के माध्यम से गुजरात हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी।
आरोपी पक्ष के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि इस मामले में वर्ष 2023 में ही पुलिस को आवेदन दिया गया था। उस समय पुलिस ने इस मामले को दीवानी विवाद (सिविल नेचर) बताते हुए आवेदन स्वीकार नहीं किया था। इतना ही नहीं, उस आवेदन को पुलिस स्टेशन में दफ्तर में ही रख दिया गया था।
लेकिन बाद में अचानक पुलिस ने उसी पुराने आवेदन को फिर से जांच में लेकर उसके आधार पर मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली। वकीलों ने दलील दी कि पुलिस की यह कार्रवाई कानूनी रूप से उचित नहीं है।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने आरोपी पिंकेश पटेल को जमानत देने का आदेश दिया।

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