
सूरत।सूरत शहर में आवारा कुत्तों को पकड़ने, टीकाकरण और नसबंदी की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता संजय इजावा ने गुजरात लोकायुक्त के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में बताया गया है कि सूरत महानगरपालिका ने पिछले पाँच वर्षों में कुल 33,761 कुत्तों को पकड़ने का दावा किया है, जबकि सरकार के 20वें लाइवस्टॉक सेंसेस के अनुसार पूरे सूरत शहर में केवल 2,754 कुत्ते ही दर्ज हैं। इन आंकड़ों में भारी अंतर होने से पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच इस कार्य पर 3.28 करोड़ रुपये से अधिक खर्च दिखाया गया है। जबकि एक कुत्ते को पकड़ने, टीकाकरण और नसबंदी का निर्धारित खर्च 1,403 रूपये है। इस हिसाब से कुल कुत्तों पर लगभग 38.63 लाख रुपये का खर्च होना चाहिए था, लेकिन रिकॉर्ड में 3.28 करोड़ रुपये खर्च दर्शाया गया है। इस तरह करीब 2.90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च संदिग्ध बताया गया है।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार मनपा ने पाँच वर्षों में कुल 33,761 कुत्ते पकड़े, जिनमें 2018-19 में: 9,987,सन 2019-20 में: 7,869,सन 2020-21 में: 1,697
सन 2021-22 में: 3,962,
सन 2022-23 में: 10,255 कुत्ते शामिल हैं।
दूसरी ओर, 20वें लाइवस्टॉक सेंसेस के अनुसार सूरत महानगरपालिका के सभी 101 वार्डों में कुल 2,754 कुत्ते दर्ज हैं। इसके बावजूद वर्ष 2022-23 में ही 10,255 कुत्ते पकड़े जाने का दावा किया गया है, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
शिकायत में यह भी सवाल उठाए गए हैं कि क्या एक ही कुत्ते को बार-बार पकड़कर खर्च दिखाया गया, क्या आंकड़ों में हेरफेर कर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, और इस कथित अनियमितता में किन अधिकारियों या एजेंसियों की भूमिका है।
फरियादी ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। जांच सूरत मनपा के आंतरिक विभाग के बजाय किसी स्वतंत्र अधिकारी या सीधे गुजरात लोकायुक्त से कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
फरियादी का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक धन और नागरिकों के टैक्स से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।



