
अहमदाबाद। राज्य में साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सरकार और पुलिस की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद ऑनलाइन धोखाधड़ी के आंकड़े चिंताजनक बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में रोजाना औसतन 3.62 करोड़ रुपये की बैंक फ्रॉड की घटनाएं सामने आ रही हैं।
जनवरी 2026 के दौरान ही देशभर में साइबर अपराधियों ने करीब 112 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज मामलों का आंकड़ा है, जबकि कई पीड़ित बदनामी या पहचान उजागर होने के डर से शिकायत ही दर्ज नहीं कराते।
गुजरात पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में प्रतिदिन लगभग 144 लोग सोशल मीडिया बुलिंग का शिकार हो रहे हैं। जनवरी 2026 में ऐसे कुल 4,468 मामले दर्ज किए गए। कई मामलों में पीड़ित मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम तक उठाने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
हाल ही में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने कॉलेज की छात्राओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को कॉल गर्ल बताकर बदनाम करने वाले 120 सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने न केवल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया, बल्कि फर्जी बुकिंग के नाम पर लोगों से ऑनलाइन पैसे भी ठगे।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि महिलाओं और नाबालिगों को निशाना बनाकर बदनामी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। औसतन हर दिन 22 महिलाएं और नाबालिग विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इस तरह की हरकतों का शिकार हो रहे हैं। जनवरी महीने में साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर ऐसे 705 मामले दर्ज किए गए।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में दर्ज करीब 54,000 करोड़ रुपये के डिजिटल फ्रॉड को “लूट और डकैती” करार देते हुए कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यह रकम देश के कई छोटे राज्यों के सालाना बजट से भी अधिक है और बैंकों तथा संबंधित एजेंसियों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बड़े ठगी मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्देश दिया है और गुजरात व दिल्ली सरकारों को जांच के लिए आवश्यक मंजूरियां देने को कहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि इन अपराधों का बढ़ता दायरा बैंकिंग और नियामक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



