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सुरत में पं.पू चिरंतनरत्नविजयजी को आचार्य पदवी प्रदान

आठ आचार्यों की निश्रा में उत्साहपूर्वक हुआ अंजन-शलाका एवं प्रतिष्ठा महोत्सव

सूरत : वेसु स्थित अग्रवाल स्कूल के समीप एटमोस्फियर ग्रीन में आयोजित भव्य समारोह में प.पू. पंन्यासप्रवर चिरंतनरत्नविजयजी को आचार्य पदवी अत्यंत हर्षोल्लास के साथ प्रदान की गई। समारोह में प.पू.आचार्य कुलचंद्रसूरि जी म.सा.,प.पू. आचार्य वर्बोधीसूरि जी म.सा.,प.पू.आचार्य पद्मदर्शनसूरि जी म.सा., प.पू.आचार्य पद्मबोधि सूरि जी म.सा.,प.पू. उपाध्याय इन्द्रविजयजी म.सा. सहित कुल आठ आचार्य-भगवंतों की पावन निश्रा रही।

प.पु. चिरंतनरत्नविजयजी, प्रेम-भुवनभानुसूरि समुदाय के ५वें आचार्य गुणरत्नसूरि जी म.सा. के शिष्य तथा आ. रश्मिरत्नसूरि जी म. के दूसरे क्रम के शिष्य हैं, जिन्हें पूर्व में आ. चिरंतनरत्नसूरिजी के रूप में घोषित किया गया था। पावन अवसर पर उछामणी सहित विभिन्न धार्मिक विधानों का आयोजन हुआ।

इस दौरान नवनिर्मित जीनालय में अंजन-शलाका प्रतिष्ठा का आयोजन भी रंगारंग ढंग से संपन्न हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पू. आचार्य कुलचंद्रसूरिजी ने कहा कि “जिनालय में जिन बिंब की स्थापना जहां होती है, वहां आत्मकल्याण के द्वार खुलते हैं।”
पू. आचार्य पद्मदर्शनसूरिजी ने सुंदर उपमा देते हुए कहा कि जैसे चंदन के वृक्षों में रहने वाले सर्पों को दूर करने हेतु मोर का एक स्वर पर्याप्त होता है, वैसे ही राग-द्वेष, मोह-माया रूपी सर्पों से आत्मा को मुक्त करने के लिए परमात्मा शरण ही मोर की पुकार बनती है।

प्रतिष्ठा अवसर पर जीवदया, अनुकंपा सहित कई सत्कर्म संपन्न हुए। जीनालय निर्माण का लाभ अतुल आंबाणी डिसावाला परिवार ने लिया।
प.पू.आचार्य पद्मदर्शनसूरिजी म.सा. 24, 25 एवं 26 नवंबर को एल.एच. रोड स्थित तृकमनगर में स्थिर रहेंगे, जहां विशिष्ट कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

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